कर्ज की जो घोषणाओं को प्रोत्‍साहन पैकेज नहीं कह सकते: कांग्रेस

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री की पीसी खत्‍म होने के कुछ देर बाद आज कांग्रेस के राज्‍यसभा सांसद आनंद शर्मा मीडिया से मुखातिब हुए। उन्‍होंने कहा कि ‘वित्तमंत्री की आज 5वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ये तो स्पष्ट है कि सरकार के पास अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोई सोच नहीं है।’
शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने ₹20 लाख करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की जो घोषणा की थी, उसका हमने स्वागत किया था लेकिन कर्ज की जो घोषणाएं वित्त मंत्री ने की हैं, उनको प्रोत्साहन पैकेज नहीं कह सकते। संक्रमण के दौरान करोड़ों लोगों का रोजगार खत्म हो गया। फैक्ट्रियां बंद हो गईं। सरकार को कर्जे से इतर MSMEs को आर्थिक सहायता देनी थी, ताकि वो कर्मचारियों को वेतन दे पाते।” कांग्रेस ने कहा, कर्ज नहीं मदद देनी चाहिए थी।
‘राशन मजदूरों का अधिकार है’
शर्मा ने प्रवासी मजदूरों पर सरकार के दावों को भी गलत ठहराया। उन्‍होंने कहा, “8 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर अभी भी रास्ते में फंसे हुए हैं। वो अपने घर नहीं पहुंच पाए हैं। वित्तमंत्री ने प्रवासी मजदूरों को राशन देने की बात कही, ये कोई अहसान नहीं है बल्कि उन मजदूरों का अधिकार है। प्रवासी मजदूरों के लिए अभी भी बेहतर व्यवस्था नहीं की गई है। हमें इससे सबक लेना चाहिए। सरकार को देखना चाहिए कि कमी कहां रह गई?”
‘MNREGA खातों में पैसे डालती सरकार’
“पीएम-किसान का पैसा प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा नहीं है, वो चुनाव पहले की घोषणा है। वृद्धों-महिलाओं को ₹500 प्रति माह देने की जो बात है, उसमें हमारा कहना है कि केवल 21% महिलाओं का जनधन खाता है। इनको मनरेगा खातों में पैसा देना चाहिए था, ताकि ज्यादा महिलाओं को लाभ मिलता। किसान से लेकर स्ट्रीट वेंडर तक को कर्ज लेने के लिए कहा जा रहा है।”
दरअसल, ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज अब पूरी तरह से देश के सामने रख दिया गया है। रविवार को वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी पांचवीं और आखिरी किस्‍त लेकर हाजिर हुईं। उन्‍होंने नीतिगत रूप से कई बड़े बदलावों की जानकारी दी। कुछ आर्थिक सुधार भी लागू किए गए हैं जिनकी मुखालफत मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस ने की है। पब्लिक सेक्‍टर एंटरप्राइजेज (PSE) पॉलिसी में बदलाव करते हुए अब सभी सेक्‍टर्स को प्राइवेट के लिए खोल दिया गया है। इसके अलावा इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍टसी कोड (IBC) में भी अहम चेंजेस किए गए हैं। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि ये समय इस तरह के ‘विवादित सुधारों’ का नहीं है।
वित्‍त मंत्री के अहम ऐलान
MNREGA के लिए बजट में अलॉट रकम से अतिरिक्‍त 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कोरोना वायरस के चलते कर्ज की किस्तें चुकाने में नाकाम कंपनियों के खिलाफ IBC के तहत एक साल तक दिवालियेपन की प्रक्रिया नहीं शुरू की जाएगी। कंपनी कानून के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बनाया गया है।
एक बड़ा फैसला करते हुए केंद्र सरकार ने सभी सेक्‍टर्स को प्राइवेट प्‍लेयर्स के लिए खोल दिया है। PSUs पहले से डिफाइन एरियाज में अहम भूमिका अदा करती रहेंगी।
केंद्र सरकार ने ‘PM eVIDYA’ नाम से एक प्रोग्राम शुरू किया है। इसके जरिए स्‍कूल एजुकेशन की खातिर ई-कंटेंट उपलब्‍ध कराया जाएगा। हर क्‍लास के लिए अलग टीवी चैनल होगा
ग्रामीण और शहरी इलाकों में हेल्‍थ एंड वेलनेस सेंटर्स की संख्‍या बढ़ेगी। हर जिले में इन्‍फेक्शियस डिजीजेज हॉस्पिटल ब्‍लॉक्‍स होंगे। ब्‍लॉक लेवल पर ही इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्‍थ लैब्‍स शुरू की जाएंगी।
‘ये सही वक्‍त नहीं…’
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि वित्‍त मंत्री ने जो भी घोषणाएं की हैं वे गरीब, मजदूर, किसान और MEMEs के लिए हैं ही नहीं। शर्मा ने कहा कि “कई सुधारों की घोषणा की गई है मगर ये समय चरमराती व्यवस्था और उद्योगों को सही रास्ते पर लाने का है…इस तरह के विवादित सुधारों की घोषणा का नहीं। इन घोषणाओं का गरीब, किसान, मजदूर, MSMEs से कोई ताल्लुक नहीं है। इनको अभी राहत की जरूरत है। ये सब भारत के नागरिक हैं, ये दया के मोहताज नहीं हैं।”
-एजेंसियां

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