पुण्‍यतिथि: निराला, पंत और महादेवी के प्रिय ‘दूधनाथ सिंह’

प्रसिद्ध कहानीकार, उपन्यासकार, नाटककार एवं कवि दूधनाथ सिंह की आज पुण्‍यतिथि है। 17 अक्‍टूबर 1936 को बलिया उत्तर प्रदेश के सोबंथा गाँव में जन्‍मे दूधनाथ सिंह की मृत्‍यु 11 जनवरी 2018 के दिन इलाहाबाद में हुई।
दूधनाथ सिंह ने अपनी कहानियों के माध्यम से साठोत्तरी भारत के पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक एवं मानसिक सभी क्षेत्रों में उत्पन्न विसंगतियों को चुनौती दी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में MA करने के पश्चात् कुछ दिनों तक कलकत्ता (अब कोलकाता) में अध्यापन किया और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापन करने लगे। सेवानिवृति के बाद वो पूरी तरह से लेखन के लिए समर्पित हो गये।
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के प्रिय रहे दूधनाथ सिंह ने आखिरी कलाम, लौट आ ओ धार, निराला: आत्महंता आस्था, सपाट चेहरे वाला आदमी, यमगाथा, धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे जैसी कालजयी कृतियों की रचना की। उनकी गिनती हिन्दी के चोटी के लेखकों और चिंतकों में होती थी। उनके तीन कविता संग्रह भी प्रकाशित हैं। इनके नाम ‘एक और भी आदमी है’ और ‘अगली शताब्दी के नाम’ और ‘युवा खुशबू’ हैं। इसके अलावा उन्होंने एक लंबी कविता- ‘सुरंग से लौटते हुए’ भी लिखी है। आलोचना में उन्होंने ‘निराला: आत्महंता आस्था’, ‘महादेवी’, ‘मुक्तिबोध: साहित्य में नई प्रवृत्तियां’ जैसी रचनाएं दी हैं।
‘हिन्दी के चार यार’ के रूप में ख्यात ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह, दूधनाथ सिंह और रवीन्द्र कालिया ने अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में हिन्दी लेखन को नई धार दी। लेखकों की पीढ़ी तैयार की और सांगठनिक मजबूती प्रदान की।
सम्मान और पुरस्कार
भारतेंदु सम्मान
शरद जोशी स्मृति सम्मान
कथाक्रम सम्मान
साहित्य भूषण सम्मान
-एजेंसियां

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