पुण्यत‍िथि: 450 फ़िल्मों में अपनी आवाज़ से छाप छोड़ने वाले अमरीश पुरी

हिंदी सिनेमा में 450 फ़िल्मों में काम कर अपनी आवाज़ से छा गए अमरीश पुरी की आज पुण्यत‍िथ‍ि है। 12 जनवरी 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह गये थे और अपने पीछे छोड़ गये अदाकारी की ऐसी विरासत, जो अर्धसत्य, निशांत और मंथन जैसी कला फ़िल्मों से शुरू होकर लोहा, घायल और करण-अर्जुन जैसी विशुद्ध मसाला फ़िल्मों को समेटे हुए है। जाने-माने अभिनेता मदन पुरी के छोटा भाई होते हुए भी अमरीश पुरी के लिए फ़िल्मों की राह आसान नहीं रही। वो भी किसी दूसरे संघर्षरत कलाकार की तरह ठुकराये गये।

50 के दशक में अमरीश पुरी ने फ़िल्मों में काम ढूंढना शुरू किया था, मगर ऑडिशन के समय उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था। उनके बेटे राजीव पुरी ने अमरीश पुरी के संघर्षों के बारे में बताते हुए कहा था- शुरुआत में जहां भी ऑडिशन देते। लोग यही कहते कि अजीब से शक्ल है। आवाज़ बहुत सख़्त है। दरअसल, वो दौर कोमल चेहरे और मखमली आवाज़ वाले हीरो का था, जिसे खांचे में अमरीश फिट नहीं बैठते थे। अभिनय से लगाव के चलते फ़िल्मों से रिजेक्शन के बाद अमरीश पुरी थिएटर की ओर मुड़ गये। 1978-79 तक अमरीश पुरी थिएटर करते रहे।

इस बीच वो कमर्शियल फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं भी निभाते रहे। 1970 में आयी देव आनंद क फ़िल्म प्रेम पुजारी में उन्होंने एक छोटी-सी भूमिका निभाकर फ़िल्मों में डेब्यू किया था। उस वक़्त अमरीश की उम्र 38 साल थी। मगर, 1975 में आयी श्याम बेनेगल की निशांत में ज़मींदार की भूमिका से अमरीश पुरी को उनके हिस्से की पहचान मिली। हालांकि, कमर्शियल फ़िल्मों में अमरीश पुरी का संघर्ष 1980 में आयी हम पांच से ख़त्म हुआ। इस फ़िल्म से अमरीश फ़िल्म इंडस्ट्री में मशहूर हो गये। इसके बाद फ़िल्मों में उनके विलेन बनने का सिलसिला चल पड़ा।

1984 में आयी स्टीवन स्पिलबर्ग की फ़िल्म इंडियाना जोंस एंड टेम्पल ऑफ़ डूम में अमरीश पुरी का मोला राम का किरदार बेहद चर्चित रहा। अमरीश पुरी की आख़िरी फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित किशना- द वॉरियर पोइड है, 2005 में उनके निधन के बाद 21 जनवरी को रिलीज़ हुई थी।

अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में हुआ था। उनके दोनों बड़े भाई चमन पुरी और मदन पुरी फ़िल्म कलाकार थे। मदन पुरी तो 60 और 70 के दौर में अपनी खलनायकी के लिए मशहूर रहे थे। पर्दे पर ख़तरनाक विलेन के रोल में दिखने वाले अमरीश पुरी निजी ज़िंदगी में काफ़ी शांत और परिवार के लिए समर्पित इंसान थे। अमरीश को कारों का शौक़ था। ख़साकर, एम्बेस्डर उनकी पसंदीदा कार थी।
– एजेंसी

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