टेलीफोन एक्सचेंज मामले में दयानिधि मारन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

नई दिल्ली। बीएसएनएल गैर-कानूनी टेलीफोन एक्सचेंज मामले में पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए सोमवार को मारन की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने मारन से कहा कि जाओ, और मुकदमे का सामना करो। बता दें कि दयानिधि मारन ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध खुद को इस मामले में आरोप-मुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।
दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने दयानिधि मारन और अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने इन सभी आरोपियों को आरोप मुक्त करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील को मंजूर करते हुए विशेष अदालत को आरोप तय करने का निर्देश दिया था और आदेश की प्रति मिलने की तारीख से एक साल के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने को कहा था।
ये है मामला
यह मामला उस वक्त का है जब द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि के रिश्तेदार दयानिधि यूपीए-1 सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि, उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और चेन्नई में अपने आवास पर निजी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित कराया, जिनका इस्तेमाल सन नेटवर्क के कारोबारी लेनदेन के लिए किया गया।
सन ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक अरबपति कारोबारी कलानिधि मारन कई मीडिया हाउस के भी मालिक हैं। सीबीआई के अनुसार, शहर के बोट क्लब और गोपालपुरम इलाकों में उनके आवासों पर 700 हाई-एंड दूरसंचार लाइनें लगाई गई, जिसके लिए बिल नहीं लिया गया और इससे सरकारी खजाने को 1.78 करोड़ का नुकसान हुआ था।
निचली अदालत ने 14 मार्च को मारन बंधुओं एवं अन्य को आरोप मुक्त करते हुए कहा था कि, उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। मामले में आरोप मुक्त किए गए अन्य आरोपियों में बीएसएनएल के पूर्व महाप्रबंधक के. ब्रह्मनाथन, पूर्व उप महाप्रबंधक एमपी वेलुसामी, दयानिधि मारन के निजी सचिव गौतमन और सन टीवी के कुछ अधिकारी शामिल हैं।
-एजेंसी

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