‘तारीख पर तारीख’: अलग होने के 24 साल बाद मिला तलाक

नई दिल्‍ली। न्यायिक देरी किसी की जिंदगी पर कितना भयानक असर डाल सकती है इसका एक ताजा उदाहरण सामने आया है। इसमें पत्नी से अलग होने के 24 साल बाद शख्स को आधिकारिक रूप से तलाक मिला है।
‘तारीख पर तारीख’ में वह ऐसा फंसा कि दूसरी शादी भी नहीं कर पाया। पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाया है। यह शादी 1988 में हुई थी लेकिन शुरुआत से ही इसमें दिक्कतें रहीं और आखिरकार 1995 में दोनों अलग रहने लगे।
अब फैसला सुनाते हुए जस्टिस राजीव सहाय ने पति की बात से सहमति जताई कि इस शादी में कुछ बचा नहीं था। उन्होंने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण भी बताया कि केस 24 साल तक चला। ऐसे मामलों में होने वाली देरी पर बात करते हुए जस्टिस राजीव ने कहा कि इनमें विस्तृत दलीलों और विस्तृत साक्ष्यों की जरूरत पड़ती है, जिसकी वजह से ट्रायल लंबा चलता है और फैसला भी देरी से आता है।
पति को दोबारा शादी से रोका
पति-पत्नी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, सिर्फ इतना बताया गया है कि दोनों सरकारी कर्मचारी हैं। 1995 में अलग होने के बाद ही शख्स ने तलाक के लिए अर्जी दी थी लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। उसके बाद हाई कोर्ट में अपील की गई। वहां 2002 से केस विचाराधीन ही था। इसके बाद 2008 में कोर्ट ने शख्स को राहत मिली भी लेकिन तब पत्नी ने अपील कर दी और बेंच ने शख्स को दोबारा शादी करने से रोक दिया।
बेंच 2018 तक इस कोशिश में थी कि किसी तरह दोनों के संबंध ठीक हो जाएं। 2018 की सुनवाई में महिला ने कहा भी कि वह पति के साथ फिर से रहने को तैयार है लेकिन आखिरी वक्त में उसने फिर मना कर दिया। इस तरह कोर्ट अब इस नतीजे पर पहुंची कि महिला 1995 के बाद से कभी भी अपने पति के साथ रहना ही नहीं चाहती थी। कोर्ट ने ऑर्डर में लिखा कि साथ न रहने के लिए रोजाना इंकार करना परित्याग के साथ-साथ क्रूरता भी है।
-एजेंसियां

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