अयोध्‍या में राजा राम के दर्शन को लेनी पड़ती है हनुमान की आज्ञा

अयोध्या के राजा के तौर पर अधिकतर लोग भगवान राम को ही जानते होंगे लेकिन असल में अब अयोध्या की गद्दी कोई और ही संभाल रहा है। जी हां…अयोध्या के महंतों की मानें तो राजा राम ने परमधाम जाने से पहले हनुमान को अयोध्या का राजा बना दिया था, तब से वह ही भगवान राम का राजकाज संभाल रहे हैं…

हनुमानगढ़ी मंदिर के आचार्य सतीश के मुताबिक अयोध्या में रामलला के दर्शन करने हों या सरयू नदी में स्नान कर अपने पाप धुलने हों, सबसे पहले भक्तों को भगवान हनुमान से आज्ञा लेनी होती है।

माना जाता है कि आज भी भगवान हनुमान पूरी अयोध्या की रक्षा करते हैं। 76 सीढ़ियां चढ़ने के बाद भक्त पवनपुत्र की 6 इंच की प्रतिमा के दर्शन करते हैं। इसके पीछे हनुमान चालिसा की ‘राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे…’ वाली मान्यता दिखाई पड़ती है।
इस मंदिर की दूसरी खास बात यह है कि यहां हिंदुओं के साथ मुस्लिम भी आते हैं।

इस मंदिर के पीछे की एक कहानी के मुताबिक अपने इकलौते पुत्र के प्राणों की रक्षा होने पर अवध के नवाब मंसूर अली ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

नवाब ने न केवल हनुमान गढ़ी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, बल्कि इस ताम्रपत्र पर लिखकर यह घोषणा की कि कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं रहेगा और ना ही यहां के चढ़ावे से कोई टैक्स वसूल किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई चल रही है। विवाद करीब 164 साल पुराना है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख बढ़ा दी। अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी।

अयोध्‍या मेें 6 दिसंबर यानी आज विवादित ढांचा ढहाए जाने के 25 साल भी पूरे हो गए हैं।
-एजेंसी