दलाई लामा के उत्तराधिकारी को पेइचिंग से मान्यता जरूरी: चीन

पेइचिंग। तिब्ब्ती धर्मगुरु दलाई लामा जहां फेंफड़े में संक्रमण के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं वहीं चीन ने एकबार फिर दोहराया है कि उनके उत्तराधिकारी के लिए पेइचिंग से मान्यता जरूरी होगी।
नई दिल्ली में मौजूद अस्पताल के मुताबिक दलाई (83) की हालत स्थिर है।
जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग से पत्रकारों ने पूछा कि क्या दलाई के उत्तराधिकारी को घोषित करने की कोई योजना है तो उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म व्यवस्था के तहत चुने गए उत्तराधिकारी को चीन की मंजूरी की जरूरत होगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही चीन ने दलाई के उस बयान को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका उत्तराधिकारी भारतीय होगा और चीन द्वारा चुने गए व्यक्ति को मान्यता नहीं दी जाएगी।
उन्होने कहा, ‘मैं 14वें दलाई लामा की शारीरिक स्थिति के बारे में अवगत नहीं हूं।’ जहां तक पुनर्जन्म मसले का सवाल है यह स्पष्ट है कि यह तिब्बती बौधों की मूलभूत व्यवस्था है। यह एक तय रीति-रिवाज है। कांग ने कहा, ‘इस धरोहर को सम्मान देने और संरक्षित करने के लिए हमारे पास संबंधित नियामक हैं। 14वें दलाई लामा को तय धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत चुना गया था और तब उन्हें तत्कालीन सरकार ने मान्यता दी थी। यानी कि पुनर्जन्म की प्रक्रिया के बाद दलाई लामा को राष्ट्रीय कानूनों, नियमों और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना होता है।’
बता दें कि दलाई लामा को फेंफड़े में सक्रमण के कारण दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है। पेइचिंग दलाई लामा को एक अलगाववादी के रूप में देखता है जो तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं। वहीं 1989 में नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई का कहना है कि वह सिर्फ तिब्बतियों के लिए अधिकार चाहते हैं जिनमें धार्मिक आजादी और स्वायत्तता शामिल है।
-एजेंसियां

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