दलाई लामा ने कश्मीर समस्या का मूल कारण भारत के विभाजन को बताया

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा कश्मीर समस्या का मूल कारण विभाजन को मानते हैं। उन्होंने कश्मीर विलय की प्रक्रिया पर तो खुलकर सवाल नहीं उठाए, परंतु यह संकेत जरूर दिए कि विलय की प्रक्रिया ही कहीं न कहीं इसके लिए आधार बनी। हिंदुस्तान के बंटवारे में जिन्ना और नेहरू की भूमिका के सवाल पर भी कुछ नहीं बोले।
तीन दिन प्रवास पर मैनपुरी के जसराजपुर आए तिब्बत के 14 वें धर्मगुरु तेनजिंग ज्ञात्सो (दलाई लामा) प्रवचन के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
दलाई लामा यहां वाईबीएस सेंटर में धम्म प्रवचन करने आए हुए हैं।
कश्मीर समस्या का हल क्या हो सकता है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका मूल कारण था हिंदुस्तान का बंटवारा।
उस दौरान जो जल्दबाजी हुई, वह वजह बनी। दलाई लामा ने कहा कि महात्मा गांधी बंटवारा नहीं चाहते थे। उन्होंने हमेशा कोशिश की देश के टुकड़े न हों। बंटवारे में जवाहर लाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की क्या भूमिका थी? इस सवाल को उन्होंने जबाव ही नहीं दिया। कई सेकेंड की चुप्पी के बाद कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान केवल धैर्य और दृढ़ निश्चय से ही हो सकता है।
इससे पूर्व धम्म प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व को भारत से सीख लेनी चाहिए। भारत का अहिंसा का सिद्धांत सभी पर लागू होता है। भारत में सभी धर्मों के लोग बिना लड़ाई-झगड़े के रहते हैं। सीरिया, यमन सहित मुस्लिम देशों में शिया और सुन्नी आपस में झगड़ा कर रहे हैं।
कुछ समय पहले बांग्लादेश में मुस्लिम और बौद्ध धर्म के लोगों में झगड़ा हुआ था, ये अत्यंत दुखद रहा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को भी भारत के सर्व धर्म अहिंसा के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।
कार्यक्रम में तिब्बत के पूर्व प्रधानमंत्री सोमदाग्ग रिमपोछे, वाईबीएस अध्यक्ष सुरेश बौद्ध, महासचिव उपनंद थेरो, कैलाश बौद्ध, डॉ. आलोक सिंह, पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, भोगांव विधायक रामनरेश अग्निहोत्री के अलावा करीब 20 देशों के अनुयायी मौजूद रहे।
-एजेंसियां

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