साइबर क्राइम: देश के 23 राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना झारखंड का जामताड़ा

नई दिल्‍ली। झारखंड भले ही आदिवासी बाहुल्य राज्य है लेकिन यहां का जामताड़ा जिला इन दिनों गलत वजहों से चर्चा में है। यूं तो जामताड़ा साक्षरता के मामले में काफी पीछे है लेकिन यहां से भारी संख्या में साइबर अपराधी पैदा हो रहे हैं। आलम यह है कि जामताड़ा देशभर में साइबर अपराध की राजधानी के रूप में चिह्नित किया जाने लगा है। देश के 23 राज्यों की पुलिस की नींद उड़ाने वाले जामताड़ा के साइबर अपराधी समय के अनुरूप ठगी करने की तकनीक को भी बदलते रहते हैं। इन दिनों साइबर अपराधियों ने ई-सिम स्वैंपिग को अपना नया हथियार बनाया है।
देश में इन दिनों ई-सिम का चलन बढ़ा तो इसी के जरिये साइबर ठग लोगों को झांसे में लेने लगे हैं। ई-सिम अपडेट या एक्टिवेट करने और बैंक खाते या वॉलेट से मोबाइल को जोड़ने व केवाइसी अपडेट करने के नाम पर ये साइबर ठग लोगों को फोन कर उन्हें विश्वास में लेते हुए निजी विवरण हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में तो ग्राहकों के बैंक खाते से जुड़े सिम का ही डुप्लीकेट सिम जारी कर ओटीपी अपने पास मंगा लेते हैं। सिम से बैंक खाते का सफर तय करने में इन्हें मिनट भर लगते हैं।
जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक अंशुमन कुमार के अनुसार मोबाइल सिम अपग्रेड करने के नाम पर ई-सिम का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी करने की जानकारी मिली है। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक अपराधी को पकड़ कर अपने साथ ले गयी है।
फरीदाबाद पुलिस की छापेमारी के बाद ई-सिम स्वैपिंग ठगी का खुलासा
साइबर अपराधियों के लिए ई-सिम नया हथियार है। लिंक के माध्यम से देश भर के पेटीएम खाता धारकों को हाल के महीनों में निशाना बना रहे थे। इसमें कॉल व लिंक भेजकर मोबाइल उपभोक्ताओं को ये अपनी ठगी के जाल में फंसा रहे हैं। इसका खुलासा हरियाणा पुलिस के हाथों संतालपरगना के दो जिलों में क्रमशः देवघर से तीन व जामताड़ा से एक अपराधी की गिरफ्तारी से हुआ है।
इन चारों अपराधियों से पूछताछ के आधार पर फरीदाबाद पुलिस पूरे रैकेट को तोड़ने में लगी है। पुलिस की माने तो इसी सप्ताह देवघर के जगदीशपुर थाना के दारवे गांव से भरत मंडल, चरकू उर्फ शत्रुघ्न व व नरेंद्र मंडल को फरीदाबाद पुलिस ने दबोचा है। दारवे गांव के कुख्यात ठगों की निशानदेही पर ही यहां अजय मंडल पुलिस के हत्थे चढ़ा था। चारों को पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर ले गई है।
सिम को 3जी से 4जी में अपग्रेड करने के बहाने खाते की जुटाते जानकारी
साइबर ठगी के इस नए तरीके को लेकर जामताड़ा पुलिस ने फरीदाबाद पुलिस से संपर्क भी किया ताकि मोबाइल धारकों को झांसा देने के नए तरीके की विस्तृत जानकारी मिल सके और अन्य अपराधियों को यहां चिन्हित किया जा सके। इन अपराधियों ने फरीदाबाद थाना के एक संभ्रांत व्यक्ति को सिम अपग्रेड करने के नाम पर कॉल किया। विश्वास में लेकर उन्हें लिंक भेजा और उनसे नए सिम के लिए अनुरोध लिया।
अनुरोध भरा लिंक साइबर अपराधियों के हाथ आने के साथ पीड़ित का सिम ब्लॉक हो गया और फिर उनके नाम से नया सिम एक्टिवेट कर ये अपराधी उनके सिम में दर्ज बैंक से जुड़ी जानकारी लेकर उनके पूरे खाते को ही खाली कर दिया।
पुलिस की मानें तो अब साइबर अपराधी विभिन्न कंपनियों के मोबाइल धारकों से लिंक व कॉल के जरिए संपर्क साध कर यह कहता है कि आपके मोबाइल सिम को ई-सिम में बदलना है। 3जी से 4जी के तौर पर उन्नत करना है। या फिर कई सुविधा पूर्ण योजना बताकर पोर्ट कराने की जानकारी देते हैं। ये खुद का परिचय संबंधित मोबाइल कंपनी के अधिकारी के रूप में देते हैं।
मोबाइल धारक को विश्वास में लेते ही पीड़ित का ई-मेल आईडी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं या फिर अपनी ई-मेल आइडी भेजकर धारक को उससे जुड़ने को कहा जाता है। ऐसा करने पर संबंधित मोबाइल धारक मोबाइल में दर्ज बैंक खाता नम्बर, अंक तक हुए लेन-देन समेत सारी जानकारी अपराधी हैक के जरिए अपने नियंत्रण में कर लेता है। फिर उनके खातों से ऑनलाइन राशि उड़ता है।
मोबाइल कंपनियों और बैंकों के कर्मचारियों से मिलीभगत
साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल नंबर पता करना कोई बड़ी बात नहीं है। उनकी पहुंच संबंधित मोबाइल कंपनियों व बैंकों तक लंबे अर्से से रही है। वे पूरे बंच में पेटीएम समेत बैंकों व मोबाइल कंपनियों से नम्बर पीडीएफ फाइल में मंगाते रहे हैं। कई बार ऐसे रैकेट का गठजोड़ दिल्ली से पंजाब तक रहने का खुलासा जामताड़ा पुलिस कर चुकी है।
पुलिस की मानें तो ई-सिम के नाम पर झांसा देकर झारखंड, बिहार, बंगाल, पंजाब, हरियाणा के सैंकड़ों राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक खातों तक पहुंच साइबर अपराधी बना चुके हैं। वे खातों से राशि उड़ाने के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक, फोनपे, ओला मनी, एयरटेल पेमेंट्स बैंक आदि से मिले वॉलेट में ट्रांसफर करते हैं।
पता चला है कि जुलाई में तेलंगाना के साइबराबाद पुलिस स्टेशन ने ई-सिम स्वैप के चार मामले दर्ज किए। इसमें धोखाधड़ी करने वालों ने 21 लाख रुपये तक की निकासी की थी। महाराष्ट्र पुलिस की साइबर विंग ने पहले ई-सिम स्वैप धोखाधड़ी के खिलाफ एक एडवाइजरी जारी की थी।
-एजेंसियां

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