Cruise ship निकाल रहा है समुद्रों में गहरे छुपी चट्टानों से दुनिया के राज़

इस Cruise ship का मिशन नंबर 369 ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में क्रिटेशियस कल्प के दौरान के हालात पता लगाने के लिए था

नई दिल्ली। वैज्ञानिक मिशन पर निकला Cruise ship जोडीज रिजॉल्यूशन दुनिया भर के समुद्रों में गहरे छुपी चट्टानों से राज निकालने का काम करता है।

समुद्री भूवैज्ञानिक कारा बोगस बताती हैं कि ये जहाज हमेशा कुछ सीधे सवालों के जवाब तलाशता फिरता है। समुद्र के भीतर स्थित चट्टानों से ये पता लगाता है कि टेक्टोनिक प्लेट्स यानी धरती के गर्भ में छिपी चट्टानों की परतें किस तरह हिलती-डुलती हैं। उनसे धरती पर क्या बदलाव आते हैं। कहां तबाही मचती है और कहां ये बदलाव फायदे का सौदा होते हैं।

इस जहाज का मिशन नंबर 369 ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में क्रिटेशियस कल्प के दौरान के हालात पता लगाने के लिए था। ये वो युग था, जब धरती पर डायनासोर पाए जाते थे। भूवैज्ञानिक रिचर्ज हॉब्स, जोडीस रिजॉल्यूशन पर सवार होकर तमाम वैज्ञानिक सवालों के जवाब तलाशते हैं। वो कहते हैं कि हमें धरती के इतिहास के बारे में गहरी जानकारी नहीं है। धरती के करोड़ों साल पुराने ज्यादातर राज समंदर में छिपे हैं।

समंदर, धरती के दो तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं। रिचर्ड कहते हैं कि इंसान ने अब तक समंदर का महज पांच फीसद हिस्सा ही खंगाला है। रिचर्ड बताते हैं कि ये जहाज समुद्र की गहराई और तलहटी से आंकडे जमा करने के लिए खास तौर से डिजाइन किया गया है।

जोडीस रिजॉल्यूशन में ऐसी मशीनें लगी हैं, जो समुद्र में करीब चार किलोमीटर तक गहराई में जाकर चट्टानों की खुदाई कर सकती हैं। वहां से नमूने इकट्ठे कर सकती हैं। ऐसी क्षमता वाला ये दुनिया का इकलौता जहाज है। रिचर्ड हॉब्स बडे तजुर्बेकार भूवैज्ञानिक हैं। वो बताते हैं कि आज धरती की जो आबो-हवा है, वो आज से 12 करोड साल पहले हुई भूवैज्ञानिक घटना का नतीजा है। उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप का पूर्वी हिस्सा अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया से जुडा हुआ था। लेकिन, धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से ये विशाल भूखंड एक-दूसरे से अलग हो गए।

जीवाश्म वैज्ञानिक ब्रायन ह्यूबर कहते हैं कि साठ के दशक से ही गहरे समुद्र में खुदाई करके चट्टान की परतों में छिपे धरती के इतिहास को खंगाला जा रहा है।
ह्यूबर कहते हैं कि आज अंटार्कटिका पर पुराने दौर के सुबूत तलाशना बहुत बड़ी चुनौती है। इसकी वजह ये है कि पूरा महाद्वीप बर्फ की मोटी परत से ढका हुआ है। मगर इसका एक फायदा ये भी है कि करोडों साल पहले के जीवाश्म, बर्फ में सुरक्षित दबे हुए हैं। ऐसे में अंटार्कटिका के गुजरे हुए कल के बहुत से राज समंदर अपनी बांहों में समेटे हुए है।

अंटार्कटिका के आस-पास के समुद्री इलाकों में बडी गहराई में छुपे हुए ये राज, अंटार्कटिका के करोडों साल के इतिहास को बयां करते हैं। अंटार्कटिका महाद्वीप पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ है। सिवाए बर्फ के दूर-दूर तक कुछ नहीं दिखता। इसे बर्फीला रेगिस्तान कहा जाता है। मगर, अंटार्कटिका पर हमेशा से ही बर्फ रही हो ऐसा नहीं है। आज से 12 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका बाकी महाद्वीपों की तरह ही हरा-भरा और जिंदगी से लबरेज था।
उस युग को जीवाश्म वैज्ञानिक क्रिटेशियस महायुग कहते हैं। उस महायुग में अंटार्कटिक की आबो-हवा आज के सर्द माहौल से बिल्कुल अलग थी। भारत, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका एक दूसरे से जुडे हुए थे। यही तीनों जमीनी विस्तार मिल कर दक्षिणी ध्रुव का इलाका बनाते थे।
-एजेंसी

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