चिकित्सा के लिये रोशनी बनती क्राउडफंडिंग

भारत में क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, विदेशों में यह स्थापित है, लेकिन भारत के लिये यह तकनीक एवं प्रक्रिया नई है, चंदे का नया स्वरूप है जिसके अन्तर्गत जरूरतमन्द अपने इलाज, शिक्षा, व्यापार आदि की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है। न केवल व्यक्तिगत जरूरतों के लिये बल्कि तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों और जनकल्याण उपक्रमों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में इसका प्रयोग अधिक देखने में आ रहा है। अभावग्रस्त एवं गरीब लोगों के लिये यह एक रोशनी बन कर प्रस्तुत हुआ है। इसे भारत में स्थापित करने एवं इसके प्रचलन को प्रोत्साहन देने के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु के प्रयास उल्लेखनीय है। असाध्य बीमारियों एवं कोरोना महामारी के पीडितों के महंगे इलाज के कारण गरीब, अभावग्रस्त एवं जरूरतमंद रोगियों की क्राउडफंडिंग के माध्यम से चिकित्सा में सहायता करते हुए देश का प्रमुख क्राउडफडिंग मंच इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम में अनूठेे कीर्तिमान स्थापित किये है। हाल ही में इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय के अंतर्गत मरीजों के लिए निःशुल्क क्राउडफंडिंग एवं धन उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
निःशुल्क धन उगाहने वाले यानी बिना किसी शुल्क के इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम ने भारत के मरीजों के लिए क्राउडफडिंग का एक प्रभावी प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया है जहां विभिन्न असाध्य बीमारियों से जुड़े मरीजों के इलाज के लिए क्राउडफडिंग के माध्यम से सभी प्रकार की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है- चाहे वह कोविड-19 हो या कैंसर, अंग प्रत्यारोपण हो या असाध्य बीमारियों में आपात चिकित्सा की स्थितियों का सामना कर रहे रोगी। मंच ने अब तक वैश्विक भागीदारों के माध्यम से 1500 करोड़ रुपये विभिन्न रोगियों के लिये जुटाए हैं।
भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रभावी एवं सस्ती चिकित्सा व्यवस्था स्थापित करना एक महत्वपूर्ण मिशन एवं विजन है, उन्होंने इसके लिये आयुष्मान भारत योजना लागू करते हुए हर व्यक्ति को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया था। लेकिन सरकार के साथ-साथ इसके लिये आम व्यक्ति को भी जागरूक होना होगा। हम स्वर्ग को जमीन पर नहीं उतार सकते, पर बुराइयों से लड़ तो अवश्य सकते हैं, यह लोकभावना जागे, तभी भारत आयुष्मान बनेगा, तभी कोरोना एवं असाध्य बीमारियों को चिकित्सा स्तर पर परास्त करने में सफलता मिलेगी, और तभी महंगी चिकित्सा, चिकित्सा जगत में व्याप्त अनियमितताओं एवं धृणित आर्थिक दृष्टिकोणों पर नियंत्रण स्थापित होगा। बीमा एवं आयुष्मान भारत योजना के होते हुए भी आज अनेक रोगियों को अपेक्षित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वे महंगे इलाज के चलते अनेक आर्थिक संकटों का सामना कर रहे हैं, उनके लिये क्राउडफंडिंग एक बड़ा सहारा बना है और क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु एक रोशनी एवं एक उम्मीद बन कर सामने आया है।
इम्पैक्टगुरु डॉट कॉम के सह-संस्थापक पीयूष जैन और खुशबू जैन ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पिछले 5 वर्षों में इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम क्राउडफडिंग के माध्यम से अब लोगों के लिए गंभीर बीमारी बिलों के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने का एक पसंदीदा माध्यम बन गया है जो अस्पतालों में बीमा के निम्न स्तर एवं जटिल प्रक्रियाओं को देखते हुए इसका प्रयोग एवं प्रचलन अधिक होने लगा है। भारत में सभी दानदाताओं के लिए हमारे निःशुल्क धन उगाहने के विकल्पों के विस्तार के साथ हम अगले दशक में 10 लाख से अधिक रोगियों की महत्वपूर्ण बीमारियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को तीव्र गति देने की उम्मीद करते हैं। 2018 में एशिया के सबसे बड़े हेल्थकेयर समूह अपोलो हॉस्पिटल्स के साथ इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम ने 2 मिलियन डाॅलर सीरीज-ए के सह समझौता के अंतर्गत एक सफल साझेदारी बनाई एवं देश के मरीजों के लिए इलाज के नये उपक्रम उद्घाटित किए। इसी तरह अन्य अस्पतालों के साथ की गई साझेदारी से अब तक हजारों रोगियों के लिए भारत भर में निःशुल्क क्राउडफंड उपलब्ध कराया जा चुका है।
श्री पीयूष जैन का मानना है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिंग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि अनेक बहुआयामी योजनाओं को आकार देने का आधार भी यही होगा। उन्होंने बताया कि भारत में हर छोटी-बड़ी जरूरतों के लिये अब क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जा रहा है। वे इस बात की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं कि आम नागरिक को चिकित्सा सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये क्राउडफंडिंग को बढ़ावा देना चाहिए।
क्राउडफंडिंग के माध्यम से इम्पैक्टगुरु डॉट कॉम अनेक रोगियों की आर्थिक सहायता का सशक्त माध्यम बना है। एनएससीबी अस्पताल, जबलपुर (मध्यप्रदेश) के 38 वर्षीय डॉक्टर धीर कुमार ने अपने कैंसर उपचार के लिए इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम के सहयोग से क्राउडफंडिग के माध्यम से 15.87 लाख रुपए जुटाए। चेन्नई के अपोलो प्रोटॉन कैंसर सेंटर में उनका इलाज चला, जहां कैंसर उपचार खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने क्राउडफंडिंग का सहारा लिया है। जयपुर के 34 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल दीपक सुथार का कुछ साल पहले एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से सामना हुआ। उनकी पुलिस बस अचानक एक भीषण जंगल में असंतुलित होकर एक चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई और दीपक को रीढ़ की हड्डी की चोट से उन्हें जीवन भर के लिए लकवा मार गया। दीपक का जीवन पंगु हो गया, निराशा की इन गंभीर स्थितियों ने दीपक को न केवल शारीरिक दृष्टि से बल्कि मानसिक दृष्टि से भी लकवाग्रस्त कर दिया। क्योंकि दीपक के कंधों पर पूरे परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी थी। दीपक के लिए अपने इलाज के पैसे इकट्ठा करना असंभव हो गया। दीपक ने अपने इलाज की लागत को जुटाने के लिए इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम के मंच के माध्यम से क्राउडफंडिंग का सहारा लिया, इस तरह उनको पुनः खड़ा करने एवं इलाज के खर्चों में क्राउडफंडिग सहारा बना।
मुम्बई निवासी अमित शेनॉय को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जो तीव्र मायलोइड ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) से पीड़ित थे। डॉ. पुनित जैन जो कि हैमाटो ओन्कोलॉजी और बोनेमेरो ट्रांसप्लेंट के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं उनकी देखरेख में उनका इलाज किया गया। डाॅ. पुनित रोगी अमित को एइलोजेनिक स्टेम सेल का प्रत्यारोपण करना चाहते थे। जो कि अत्यधिक खर्चीली होने की वजह से अमित के परिवार के सम्मुख एक चुनौती था। इस इलाज के लिए इम्पैक्ट गुरु डाॅट काॅम पर अमित के लिए वित्तीय सहायता जुटाने का उपक्रम प्रारंभ किया गया। जिसमें क्राउडफंडिंग के माध्यम से 7 दिनों में लगभग 45 लाख रुपये की वित्तीय सहायता जुटाने का एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। झारखण्ड के आयुष के गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए क्राउडफंडिंग से पंद्रह घंटों में 21 लाख रुपये जुटाए गए। ऐसे हर दिन अनेक उदाहरण सामने आ रहे हैं। भारत में सरकारी अस्पतालों को निजी अस्पतालों की तुलना में अधिक सक्षम बनाने की जरूरत है, तभी हम वास्तविक रूप में महंगे चिकित्सा की खामियों का वास्तविक समाधान पा सकेंगे लेकिन इसके साथ-साथ क्राउडफंडिंग के माध्यम से जरूरतमंद एवं गरीब रोगियों की सहायता को भी प्रोत्साहन देने की जरूरत है। अवगत हो क्राउडफंडिंग, चिकित्सा खर्च के लिए ऑनलाइन धन जुटाने का एक वैकल्पिक तरीका है। रोगी के दोस्त या परिवार के सदस्य एवं दानदाता मुख्य रूप से सोशल मीडिया नेटवर्क पर भरोसा करते हुए संबंधित चिकित्सा बिलों के धन का दान करते हैं। क्राउडफंडिंग का अतिरिक्त लाभ यह है कि मरीजों को उस धनराशि को वापस नहीं करना पड़ता है क्योंकि ऑनलाइन प्रदान किया गया धन दान है न कि ऋण। इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम मेडिकल खर्च के लिए भारत में सबसे बड़ा क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म बन गया है। इम्पैक्टगुरु डाॅट काॅम के माध्यम से 200,000 से अधिक दाताओं से 20,000 रोगियों को लाभ पहुंचाया गया है।
इम्पैक्ट गुरु ने क्राउडफंडिंग के माध्यम से करोड़ों रूपयों की चिकित्सा सहायता एवं अन्य जरूरतों के लिये आर्थिक संसाधन जुटाये हैं। केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जबकि अब कला, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन को समृद्ध करने का भी सशक्त माध्यम है। ऐसा होने से क्राउडफंडिंग की उपयोगिता एवं महत्ता सहज ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी।

 

– ललित गर्ग,
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

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