पावर कॉरपोरेशन में करोड़ों का घोटाला: 2001 में जांच के बाद कार्यवाही की संस्‍तुति लेकिन FIR नवंबर 2018 में

Crores scam in Power Corporation: Action recommendation after the investigation in 2001 but FIR in November 2018
पावर कॉरपोरेशन में करोड़ों का घोटाला: 2001 में जांच के बाद कार्यवाही की संस्‍तुति लेकिन एफआईआर नवंबर 2018 में

लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन में हुए करोड़ों के घोटाले की विजिलेंस जांच के बाद हजरतगंज थाने में अब एफआईआर दर्ज करवाई गई है जबकि विजिलेंस विंग ने 2001 में ही कार्यवाही की संस्तुति कर दी थी।
घोटालों की जांच दबाने और अपने चहेतों को बचाने के लिए अफसर किस तरह खेल करते हैं, इसकी बानगी यूपी पावर कॉरपोरेशन में हुआ यह घोटाला है। बताया जाता है कि घोटाले से जुड़े दस्तावेज भी गायब कर दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक पावर कॉरपोरेशन में हुए करोड़ों के घोटाले की जांच के लिए भाजपा के तत्कालीन एमएलसी ब्रजभूषण सिंह कुशवाहा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह को 1 जुलाई 2001 को पत्र लिखा था। ब्रजभूषण सिंह कुशवाहा के इस पत्र पर कार्यवाही के निर्देश तो हुए, लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। मार्च 2002 में भाजपा सरकार चली गई और मई में मायावती मुख्यमंत्री बनीं। 23 अगस्त 2002 को विधानसभा में इस पर कार्यवाही की प्रगति को लेकर सवाल उठा। सवाल उठने पर तत्‍कालीन ऊर्जा मंत्री ने जल्द जांच कराने का आश्वासन दिया लेकिन उसके बाद कोई जांच या कार्यवाही होने की बजाय पत्रावलियां गायब कर दी गईं।
गुमराह करते अफसर
विधानसभा की आश्वासन समिति की हाल ही में हुई बैठकों के दौरान यह मामला फिर उठा। इस पर ऊर्जा विभाग से प्रगति पूछी गई। विभाग के आला अधिकारी समिति को फाइलें ढ़ुढ़वाने का आश्वासन देते रहे। समिति ने सख्त रुख अपनाया तो बताया कि पत्रावलियां नहीं मिल रही हैं। 28 मई को समिति ने फिर पूछा कि आपने इस पर क्या ऐक्शन लिया तो अफसर जवाब नहीं दे पाए। अगली बैठक में फजीहत से बचने के लिए अफसरों ने 30 मई को पुलिस विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर फाइल गायब होने की सूचना दर्ज करवा दी। समिति इससे संतुष्ट नहीं हुई और ठोस कार्यवाही कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
दोपहर में बैठक, सुबह एफआईआर
शुक्रवार यानी 16 नवंबर 2018 को दोपहर में फिर आश्वासन समिति की बैठक थी। इससे पहले ही सुबह हजरतगंज थाने में एक तहरीर दी गई, जिसमें कहा गया है कि करोड़ों रुपये के घोटाले पर कार्यवाही से संबंधित पत्रावली या अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं इसलिए 2001- 2002 में कार्यरत अज्ञात अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए। हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर राधा रमण सिंह का कहना है कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है, लेकिन इतने पुराने घोटाले से जुड़ी फाइलें और अफसरों को तलाशना चुनौती है।
–लखनऊ ब्‍यूरो

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