तालिबान पर भरोसा करने के फ़ैसले को लेकर अमेरिका की आलोचना

काबुल एयरपोर्ट के बाहरी घेरे की सुरक्षा के लिए तालिबान पर भरोसा करने के फ़ैसले को लेकर अमेरिका को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
गुरुवार शाम संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, “ये भरोसे की बात नहीं है. ये आपसी हितों की बात है… लेकिन ग्राउंड पर मौजूद हमारे किसी भी कमांडर द्वारा अभी तक ऐसा कोई सबूत मेरे सामने नहीं रखा गया है जिससे जो कुछ हुआ, उसमें तालिबान और इस्लामिक स्टेट की मिलीभगत साबित होता हो.”
विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट (विदेश मंत्री) एंथनी ब्लिंकेन से ये सवाल पूछा गया कि अफ़ग़ानिस्तान में एक वैध मान्यता प्राप्त सरकार का गठन नहीं हो पाया है, ऐसे में तालिबान जो चाहता है, अमेरिका को उस पर क्यों ध्यान देना चाहिए?
उन्होंने कहा कि “भले ही हम ये पसंद करें या न करें, तालिबान के पास अफ़ग़ानिस्तान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है. इसमें कोई शक नहीं कि काबुल शहर पर उनका नियंत्रण है. जो लोग अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना चाहते हैं, उन्हें निकालने के काम को सुनिश्चित करने के लिए ये ज़रूरी है कि हम उनके साथ काम करें.”
सेक्रेटरी ब्लिंकेन ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका के निकल जाने के बाद वहां जो कुछ होता है, हम इस पर तालिबान से बातचीत जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि हम पिछले कुछ सालों से तालिबान के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए हैं ताकि अफ़ग़ानिस्तान के संघर्ष के शांतिपूर्ण समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.”
-एजेंसियां

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