यमुना प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट में CPCB ने दाखिल की इंस्पेक्शन रिपोर्ट

नई द‍िल्ली। तपेश भारद्वाज बनाम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केस की सुनवाई के दौरान आज सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश अरुण मिश्रा व इंदिरा बनर्जी की पीठ ने यमुना प्रदूषण पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की इंस्पेक्शन रिपोर्ट पर बोर्ड व सरकार से नाराजगी जाहिर की।

याचिकाकर्ता तपेश भारद्वाज के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व छावनी परिषद पर जुर्माने की राशि को और बढ़ाने की मांग करते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की इंस्पेक्शन रिपोर्ट से यह साफ है कि छावनी परिषद मथुरा व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनजीटी के आदेशों का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया गया।

अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी इंस्पेक्शन रिपोर्ट में साफ कहा है कि छावनी परिषद मथुरा, डेरी फार्म के निकट जहाँ म्युन‍िस‍िप‍ल सॉलिड वेस्ट का निस्तारण कर रहा है वहां सबसे पहले एक अलग स्टोरेज बनाने की जरूरत है और पूरी वेस्ट डिस्पोजल साइट को बाउंड्री वॉल से कवर करने की जरूरत है, जिसका अभी तक परिषद द्वारा अनुपालन नहीं किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि छावनी परिषद उस पूरे क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट बनाए तथा जहां कूड़े का निस्तारण कर रहा है उसकी अनुमति भी ले।

सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व छावनी परिषद को सख्त हिदायत देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए मार्च के पहले सप्ताह की तारीख तय की है और कहा है कि तब तक कार्य पूरा ना किया गया तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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