कोर्ट का व्हाइट हाउस को निर्देश, CNN के पत्रकार की मान्‍यता बहाल करें

वॉशिंगटन। अमरीकी कोर्ट के एक जज ने व्हाइट हाउस को निर्देश दिया है कि वो केबल न्यूज़ नेटवर्क CNN के वरिष्ठ पत्रकार जिम एकोस्टा की मान्यता फिर बहाल करे.
इसी महीने व्हाइट हाउस में एक प्रेसवार्ता के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ बहस के बाद जिम एकोस्टा का ‘प्रेस हार्ड पास’ वापस ले लिया गया था.
जज ने अपने आदेश में कहा है कि पत्रकार का पास लौटाया जाना चाहिए क्योंकि डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ CNN का मुकदमा अभी भी अदालत में है.
जज का कहना था कि व्हाइट हाउस का फ़ैसला पत्रकार के प्रक्रिया में शामिल हो सकने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का उल्लंघन है.
जिम एकोस्टा ने अदालत के फ़ैसले की प्रशंसा की है और कोर्ट के बाहर एकत्र पत्रकारों से कहा, “चलिए अपने काम पर लौटा जाएं.”
कोर्ट के फ़ैसले पर अब तक व्हाइट हाउस की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
कोर्ट के आदेश के बाद व्हाइट हाउस प्रेस ऑफ़िस ने अस्थायी रूप से एकोस्टा का ‘हार्ड पास’ लौटा दिया है. इसी कार्ड की मदद से पत्रकार व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति के आयोजनों में शामिल हो सकते हैं.
एकोस्टा के वकील ने कहा, “पत्रकारिता की दुनिया में आज का दिन महान दिनों में गिना जाएगा.”
क्या था पूरा विवाद?
7 नवंबर को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दफ़्तर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेस में राष्ट्रपति और एकोस्टा के बीच बहस हो गई. इसके बाद 8 नवंबर को उनका ‘प्रेस हार्ड पास’ वापस ले लिया गया और उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश करने से रोक दिया गया.
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ही कहा था कि सीएनएन का पत्रकार एक बेहद ‘बदतमीज़ और अक्खड़’ इंसान हैं.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक सरकारी कर्मचारी ने जिम एकोस्टा से माइक छीनने की कोशिश की थी. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.
बाद में डोनल्ड ट्रंप की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने पूरे विवाद पर कहा था कि सीएनएन संवाददाता जिम एकोस्टा की मान्यता को ‘एक महिला के साथ बदसलूकी करने के आरोप’ में रद्द किया गया है.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सीएनएन ने ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ मुकदमा दायर किया और आरोप लगाया कि ये एकोस्टा के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.
इस मुकदमे में राष्ट्रपति ट्रंप और उनके दूसरे सहयोगियों को प्रतिवादी बनाया गया है.
जज ने क्या कहा?
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि जज टिमोथी केली की नियुक्ति बीते साल ट्रंप ने ही की थी. जज केली ने कहा कि एक व्यवस्थित प्रेस वार्ता करने के व्हाइट हाउस के अधिकार के मुक़ाबले एकोस्टा के संवैधानिक अधिकार अधिक महत्व रखते हैं.
उन्होंने ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले की निंदा की और कहा कि पूरी प्रक्रिया “कुछ इस कदर रहस्य से घिरी थी कि सरकार मुझे ये नहीं बता पाई कि… ये फ़ैसला आख़िर किसका था.”
उन्होंने कहा कि एकोस्टा पर आरोप लगाने वाला सारा सैंडर्स का बयान “देर से उठाया गया कदम लग रहा था और संतोषजनक नहीं था.”
हालांकि, कोर्ट में दिए गए दस्तावेज़ों के अनुसार व्हाइट हाउस ने कहा है कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये फ़ैसला लिया गया था और उन्होंने किसी महिला के ख़िलाफ़ अभद्र व्यवहार के बारे में कुछ नहीं कहा है.
जज केली ने कहा कि व्हाइट हाउस को पत्रकार को प्रेस वार्ता में आने का मौक़ा देना चाहिए लेकिन ज़रूरत पड़ने पर सवाल जवाब के दौरान वो उन्हें बैठने के लिए कह सकते हैं.
इस मामले में अगली सुनवाई अब अगले सप्ताह है. हालांकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि व्हाइट हाउस पत्रकार की मान्यता रद्द करने के लिए एक बार फिर गुज़ारिश करेगा या नहीं या फिर जिम एकोस्टा को व्हाइट हाउस में सीएनएन के मुख्य संवाददाता के रुप में काम करने दिया जाएगा.
सीएनएन ने एक बयान जारी कर कहा है, “फ़ैसले से हम खुश हैं और हमें उम्मीह है कि अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा.”
“हम उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं जिन्होंने न केवल सीएनएन का समर्थन किया बल्कि एक मज़बूत, निरपेक्ष और आज़ाद अमरीकी प्रेस का भी समर्थन किया.”
-BBC

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