वीटो का इस्‍तेमाल करके चीन जैसे देश हमें आतंकयों को प्रतिबंधित करने से नहीं रोक सकते: अमेरिका

Countries like China can not prevent us from restricting terrorism by using veto: America
वीटो का इस्‍तेमाल करके चीन जैसे देश हमें आतंकयों को प्रतिबंधित करने से नहीं रोक सकते: अमेरिका

यूनाइटेड नेशंस। अमेरिका ने मंगलवार को चीन का नाम लिए बिना कहा कि जो देश आतंकवादियों को प्रतिबंधित करने के मामले में वीटो का इस्तेमाल करके बाधा पहुंचा रहे हैं, वो ऐसा करके भी उसे ऐक्शन लेने से नहीं रोक सकते।
अमेरिका ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब भारत की लगातार कोशिशों के बाद यूएन द्वारा पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में चीन लगातार रोड़े अटका रहा है।
यूएन के लिए अमेरिकी राजदूत निकी हैली ने अप्रैल महीने के लिए सिक्यॉरिटी काउंसिल की प्रेजिडेंट का पद संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि जिन कुछ चीजों पर चर्चा की गई हैं, उनमें प्रतिबंध और लिस्ट में शामिल लोग भी हैं। निकी से यूनाइटेड नेशंस सिक्यॉरिटी काउंसिल (UNSC) की प्रतिबंधित लिस्ट में आतंकवादियों को खासतौर पर साउथ एशियाई इलाके से जुड़े आतंकवादियों को शामिल करने से जुड़ी कोशिशों के बारे में पूछा गया था। चीन का बिना नाम लिए इस बात का भी जिक्र किया गया कि किस तरह सुरक्षा परिषद के कुछ स्थाई सदस्य वीटो पावर का इस्तेमाल करके इन कोशिशों को नाकाम कर रहे हैं।
हैली ने इस पर कहा, ‘क्या हम वीटो से जुड़े लोगों पर कुछ करने वाले हैं? हां, बिलकुल यह अमेरिका को कार्यवाही करने से नहीं रोक सकता। निश्चित तौर पर यह हमें यह देखने से रोक नहीं सकता कि हम कुछ बदलाव कर सकते हैं कि नहीं। हमारा मकसद है कि हम मिलकर उससे ज्यादा करें जो हम अलग-अलग कर सकते हैं। अगर हम अलग-अलग नहीं कर सकते तो हम इन चीजों को करने के लिए दूसरी दिशा में बढ़ेंगे।’
उनके मुताबिक, यूएस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वह एक ‘नतीजे’ की ओर बढ़ रहा है, बस ‘बैठा नहीं हुआ’ और चीजों को खुद ब खुद होने नहीं दे रहा।

भारत और पाकिस्तान के बीच कड़वाहट को कम करना चाहते हैं डॉनल्ड ट्रंप

भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा कड़वाहट को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कम करना चाहते हैं। खुद अमेरिका की ओर से ऐसा कहा गया है। यूनाइटेड नेशंस में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि निकी हैली ने कहा कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है और इसलिए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया में शामिल होकर इसे सुलझाना चाहते हैं।
ट्रंप प्रशासन में कैबिनेट रैंक रखने वालीं हेली ने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित मौजूदा अमेरिकी प्रशासन इसे कम करने की दिशा में अपनी भूमिका पर विचार कर रहा है। यह भी संभव है कि राष्ट्रपति खुद इसमें भागीदार बनें और इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा।’
#WATCH Nikki R Haley(Permanent Rep of the US to UN) speaks on if Washington would make any effort to get India&Pak to engage in peace talks. pic.twitter.com/uL02Z8iwX8
—ANI (@ANI_news) April 4, 2017
गौरतलब है कि भारत, पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी भी बाहरी पक्ष की भागीदारी का विरोध करता रहा है। ट्रंप ने 2016 में अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा तभी होगा जब दोनों देश यह चाहेंगे।
हैली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अप्रैल माह की अध्यक्षता अमेरिका द्वारा संभाले जाने के मौके पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रही थीं। हैली का यह बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर ट्रंप प्रशासन की ओर से पहली उच्च स्तरीय टिप्पणी है।
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी 2008 के राष्ट्रपति प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता कर सकता है। हालांकि भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी और ओबामा ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी इस बात को सक्रियता के साथ आगे नहीं बढ़ाया था। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका क्या कदम उठाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई में वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।
-एजेंसी

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