कोरोना काल: डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत

भारत को डायबिटीज की राजधानी भी कहा जाता है। कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है और अब तक दुनिया भर में लाखों लोगों की जान इस वायरस के कारण जा चुकी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस की महामारी ने सबसे ज्यादा डायबिटीज और हृदय रोग के मरीजों की ली है। ऐसे ही कुछ मामले भारत से भी सुनने को मिले हैं जहां पर कोरोना वायरस के कारण ऐसे लोगों की मौत ज्यादा हुई है जो किसी न किसी अंडरलाइंग डिसीज से जूझ रहे थे। कुछ मामलों के आधार डॉक्टरों ने डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कुछ खास बातें बताई हैं।
इसके साथ-साथ आपको यह भी बताया जाएगा कि कोरोना वायरस डायबिटीज के मरीजों के लिए ही क्यों ज्यादा घातक साबित हो रहा है।
डायबिटीज के मरीजों पर क्यों जानलेवा साबित हो रहा है कोरोना वायरस
कोरोना वायरस डायबिटीज के मरीजों के शरीर में प्रवेश करने के बाद बड़ी तेजी से संक्रमण को फैलाता है। एक अध्ययन में यह देखा गया कि आमतौर पर यह संक्रमण जब किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है तो इसके फैलने की दर काफी धीमी होती है और रिकवरी की संभावना भी काफी ज्यादा होती है।
डायबिटीज से जूझ रहे व्यक्ति के शरीर में जब कोरोना वायरस पहुंचता है तो यह बड़ी तेजी से श्वसन तंत्र को जकड़ने लगता है। संक्रमित व्यक्ति अगर संक्रमण को पहचानने और सही समय पर इलाज के लिए हॉस्पिटल तक नहीं पहुंच पाता तो यह स्थिति उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
​दूसरा कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता भी
यह बात तो हम सभी को पता है कि किसी भी बीमारी से जूझ रहे लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। इसका संबंध डायबिटीज के मरीजों से भी है। डायबिटीज के मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी स्वस्थ व्यक्ति के मुकाबले काफी कमजोर होती है और वह आसानी से किसी भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
ऐसे मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद की स्थिति और भी भयानक हो जाती है और रिकवरी भी काफी स्लो होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उनके शरीर में संक्रमण काफी तेजी से फैलता है और दवाओं का असर भी धीरे-धीरे होता है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए कोरोनावायरस ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है।
स्ट्रेस के कारण बढ़ जाता है और खतरा
हाल ही में एक शोध के बाद यह बताया गया था कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले मरीजों के द्वारा अगर ज्यादा स्ट्रेस लिया गया तो यह मौत के खतरे को कई गुना तक बढ़ा देता है। डायबिटीज के मरीज पहले ही एक बीमारी से जूझ रहे होते हैं और कोरोना वायरस का संक्रमण उनके दिमागी स्ट्रेस को और भी बढ़ा सकता है।
आपको जानकर यह हैरानी होगी कि स्ट्रेस के कारण भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, लेकिन यह सच है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद इसका सीधा असर डायबिटीज के मरीजों पर और भी बुरा प्रभाव दिखा सकता है।
संक्रमित होने के बाद क्या करें
डायबिटीज के मरीजों को जब इस बात का अंदेशा हो जाए कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं या फिर उनमें ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बिना देर किए तुरंत जांच और इलाज के लिए जाना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को खास तौर पर स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए, नहीं तो यह उनके लिए और भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। कोशिश करें कि इलाज के दौरान डॉक्टर के द्वारा बताई गई सभी बातों का गंभीरतापूर्वक पालन करें और नियमित रूप से सीमित मात्रा में काढ़े का सेवन जरूर करें।
बचने के लिए करें यह काम
संक्रमण से बचे रहने के लिए न केवल डायबिटीज के मरीज बल्कि आम लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। हर एक छोटी से छोटी सेफ्टी टिप्स का पालन करें और इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जब भी घर से बाहर निकलें तो किसी भी सर्दी खांसी और जुकाम से पीड़ित व्यक्ति के पास में ना जाएं। डायबिटीज के मरीज आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए काढ़े को घर पर बनाकर पीने के लिए इस्तेमाल करते रहें।
-एजेंसियां

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