सांसों पर ही नहीं द‍िल पर भी पड़ता है कोरोना का negative प्रभाव

अभी तक तो नॉवेल कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में केवल सांस की बीमारियां ही पता चलीं थीं परंतु अब दिल की बीमारियों का भी पता चला है, कोविड-19 के कारण संक्रमित मरीजों के कार्डिया वैस्कुलर सिस्टम पर निगेटिव प्रभाव पड़ता है और इसलिए हर्ट प्रॉब्लम्स के मॉनिटरिंग की जरूरत है।

अमेरिका में वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (artificial intelligence, AI) का एल्गोरिद्म विकसित किया है जो कोविड-19 के मरीजों में कार्डिएक संबंधित मामलों की जांच करेगा जैसे दिल का दौरा, असामान्य दिल की धड़कनों की मॉनिटरिंग करेगा।

अमेरिका में जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि हाल में ही उन्हें स्टडी के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन (National Science Foundation) की ओर से 195,000 डॉलर दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 के कारण संक्रमित मरीजों के कार्डिया वैस्कुलर सिस्टम पर निगेटिव प्रभाव पड़ता है और इसलिए हर्ट प्रॉब्लम्स के मॉनिटरिंग की जरूरत है। हालांकि शोधकर्ताओं ने कहा कि अभी इस तरह के पूर्वानुमान वाली कोई व्यवस्था नहीं है। यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नतालिया त्रेयानोवा ने बताया, ‘यह प्रोजेक्ट डॉक्टरों को प्रारंभिक लक्षणों से अवगत कराएगी और मरीज की जरूरत के बारे में भी सलाह देगी। एक साल के प्रोजेक्ट के पहले चरण के तहत 300 से अधिक संक्रमित मरीजों का डाटा संकलित किया गया।

दुनिया के तमाम देश इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए वैक्सीन व दवाओं को विकसित करने की तैयारी में जुटे हैं। वहीं चीन से निकली इस महामारी के लिए अमेरिका समेत कई देश बीजिंग को दंडित करने के मूड में हैं। अमेरिका ने तो इसके लिए कई फैसले भी ले लिए हैं। दरअसल, पिछले साल के दिसंबर माह में चीन के ही हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान के वेट मार्केट से यह वायरस निकला था। इसके बाद 2020 के शुरुआती चार महीनों में ही पूरी दुनिया के सभी देश इस घातक वायरस के चपेट में आ गए। अमेरिका ने तो यहां तक कहा है कि चीन के वुहान लैब में इस घातक वायरस को विकसित किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) के अनुसार, 17 मई की शाम करीब 7 बजे तक कुल संक्रमितों का आंकड़ा 4,534,731 हो गई जिसमें से 307,537 हो गई।
– एजेंसी

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