COP-26 समिट: ग्‍लोबल लीडर की भूमिका में पीएम मोदी, नेट जीरो का प्‍लान सामने रख LIFE का मंत्र दिया

पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रदूषण कम करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की बात बहुत पहले से की जा रही है। अब बात नेट जीरो एमिशन की हो रही है। ग्लास्गो में हुई COP-26 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर एक नया शब्द LIFE यानी लाइफ स्टाइल फॉर एनवायर्मेंट सामने रखा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेट जीरो के लक्ष्य को पाने के लिए इसे जनांदोलन बनाने की बात कही है। उन्होंने भारत की तरफ से पांच अमृत तत्व पंचामृत का सिद्धांत रखा है। इसमें भारत ने नेट जीरो को लेकर अपना पूरा प्लान बताया है।
ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता
दुनिया भर के प्रमुख देश ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है। कुछ देशों ने तो ग्लोबल वार्मिंग को ध्यान में रखकर काम करना भी शुरू कर दिया है और कुछ देश जागरूकता फैलाने की दिशा में काम कर रहे हैं जिससे साल 2050 से पहले इसमें सुधार हो सके। दुनिया के बहुत से देशों का मानना है कि यदि अभी से ग्लोबल वार्मिंग को कम करने की दिशा में काम नहीं शुरू किया गया तो बहुत देर हो जाएगी।
नेट जीरो एमिशन क्याहै?
नेट जीरो एमिशन का मतलब ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन शून्य करना नहीं है, बल्कि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को दूसरे माध्यम से बैलेंस करना है। नेट जीरो एमिशन का मतलब एक ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करना, जिसमें फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल ना के बराबर हो, कार्बन उत्सर्जन करने वाली दूसरी चीजों का इस्तेमाल भी बहुत कम हो।
नेट जीरो एमिशन का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
किसी देश में जितना कार्बन पैदा हो रहा है उतना ही उसे एब्जॉर्ब करने का इंतजाम होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर पेड़-पौधे हवा से कार्बन डाईऑक्साइड लेकर अपना खाना तैयार करते हैं। अगर किसी देश की इकनोमी में कार्बन अधिक पैदा हो रहा है तो उसे उसी संख्या में पेड़-पौधे लगाने पर ध्यान देना चाहिए। नेट जीरो एमिशन का मतलब एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें कार्बन उत्सर्जन का कुल स्तर लगभग शून्य हो।
कार्बन का उत्सर्जन कम करना जरूरी
अगर किसी कंपनी के कारखाने से सालाना कार्बन की एक निश्चित मात्रा का उत्सर्जन होता है और कंपनी इतने पेड़ लगाती है जो उतना कार्बन यूज कर सके तो उसका नेट एमिशन जीरो हो जाएगा। इसके साथ ही कंपनियां पवन एवं सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर भी इसी प्रकार का लाभ पा सकती हैं। यही बात किसी देश के लिए भी लागू होती है। अभी दुनिया में भूटान और सूरीनाम ऐसे देश हैं जिनका नेट एमिशन निगेटिव है। इसकी बड़ी वजह इन देशों में मौजूद हरियाली और कम उद्योग-धंधे एवं आबादी है।
कार्बन न्यूट्रल होगा यूरोप
यूरोपीय संघ ने समझौता किया है कि साल 2050 तक यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देश कार्बन न्यूट्रल हो जाएंगे। यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने कहा कि तमाम देशों के बीच जलवायु परिवर्तन को लेकर एक समझौता हुआ है, यह बेहद जरूरी था। यूरोप की कार्बन उत्सर्जन को लेकर एक इच्छाशक्ति दिखाना महत्वपूर्ण था।
नेट जीरो एमिशन की जरूरत
अगर मौजूदा तरीके से ही ग्रीन हाउस गैस का एमिशन होता रहा तो साल 2050 तक धरती का औसत तापमान दो डिग्री बढ़ जाएगा। ऐसा होने के बाद कहीं भीषण सूखा पड़ेगा तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आएगी। ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का जल स्तर बढ़ेगा, इससे समुद्र के किनारे बसे कई शहर पानी में डूब जाएंगे और उनका नामोनिशान मिट जाएगा।
भारत के लिए नेट जीरो एमिशन
भारत में ऊर्जा की कुल जरूरत का 70% थर्मल पावर से आता है। नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को पाने के लिए कोयले का इस्तेमाल कम करना पड़ेगा। भारत का कहना है कि नेट जीरो एमिशन तब तक नहीं संभव है जब तक क्लीन टेक्नोलॉजी का पेटेंट विकासशील और अंडर डेवलप देशों को ट्रांसफर नहीं किया जाता। ऐसा होने पर ये देश तेजी से क्लीन इकनॉमी की ओर बढ़ेंगे।
PM मोदी ने दिया LIFE का मंत्र
प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि “पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली” को वैश्विक मिशन बनाया जाए। मोदी ने कहा, “यह जरूरी है कि हम सभी एकसाथ आएं और सामूहिक साझेदारी करें और ‘पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली’ को आंदोलन की तरह लेकर आगे चलें। यह पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली के लिए जन आंदोलन बन सकता है। हमें सोच-विचार कर और संकल्पित होकर इसका इस्तेमाल करना होगा। यह आंदोलन हमें लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है जिससे विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा,जैसे मत्स्य, कृषि, स्वास्थ्य, भोजन की पसंद, पैकेजिंग, पर्यटन, वस्त्र, जल प्रबंधन और ऊर्जा।’’
-एजेंसियां

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