NCLAT के पूर्व चेयरपर्सन को लेकर पैदा हुए विवाद का पटाक्षेप

नई दिल्‍ली। NCLAT के पूर्व चेयरपर्सन जस्टिस अशोक इकबाल सिंह चीमा के समय से पहले रिटायरमेंट को लेकर पैदा हुआ विवाद आज समाप्त हो गया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एनसीएलएटी के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति एआईएस चीमा को 20 सितंबर तक पद पर बने रहने दिया जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक चीमा फैसले सुनाने के लिए पद पर बने रहते हैं, तब तक एनसीएलएटी के निवर्तमान कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस एम वेणुगोपाल अवकाश पर रहेंगे।
एनसीएलएटी के कार्यकारी अध्यक्ष चीमा को 10 दिन पहले ही रिटायर कर दिया गया था जबकि पांच मामलों में उन्होंने फैसला सुरक्षित कर रखा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चेताया था कि हम आपके ट्राइब्यूनल रिफॉर्म एक्ट को स्टे कर देंगे। फिर अटॉर्नी जनरल ने कहा चीमा के बाद बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष को सरकार लीव पर भेजेगी और इस दौरान चीमा फैसले देंगे।
समझिए क्या है विवाद
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति चीमा को 20 सितंबर को रिटायर होना था लेकिन उनकी जगह 11 सितंबर को ही न्यायमूर्ति एम वेणुगोपाल को न्यायाधिकरण का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इसके चलते एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई और न्यायमूर्ति चीमा ने शीर्ष अदालत में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह इस बात पर चिंता जताई थी कि केंद्र सरकार अर्द्ध-न्यायिक निकायों में अधिकारियों की नियुक्ति नहीं कर रही है जिससे वे ‘प्रभावहीन’ हो रहे हैं।
आज क्या-क्या हुआ
आज अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ को बताया, ‘मैंने निर्देश ले लिया है। ऐसा बताया गया कि उन्होंने (चीमा) फैसला लिखने के लिए छुट्टी ली थी इसलिए हमने फैसला किया है कि उन्हें कार्यालय जाने और फैसला सुनाने की अनुमति दी जाएगी, वर्तमान अध्यक्ष न्यायमूर्ति वेणुगोपाल को छुट्टी पर भेजा जाएगा।’
पीठ ने कहा, ‘इस दलील को स्वीकार किया जाता है और (सरकार द्वारा) इसके आदेश जारी किए जाएंगे। वर्तमान अध्यक्ष 20 सितंबर तक छुट्टी पर रहेंगे और यह आदेश इस मामले के असाधारण तथ्यों और हालात को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया है।’
-एजेंसियां

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