राजस्थान में स्वत: ही समाप्त हो गया दागियों को बचाने वाला विवादास्पद Ordinance

जयपुर। भ्रष्ट नेताओं और सरकारी अधिकारियों को को बचाने वाला राजस्थान सरकार का Ordinance सोमवार को संवैधानिक रूप से स्वत: ही समाप्त हो गया। वसुंधरा राजे सरकार की ओर से यह विवादित Ordinance 6 सितंबर को लागू किया गया था और फिर भारी विरोध के बीच 23 अक्टूबर को अध्यादेश से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का सदन और सड़क दोनों ही जगहों पर भारी विरोध हुआ था।

Ordinance पेश किए जाने के बाद अध्यादेश की अवधि 42 दिन की होती है, सरकार विधानसभा में यह विधेयक पास नहीं करा सकी, ऐसे में 4 दिसंबर यानि सोमवार को 42 दिन की अवधि पूरी हो गई व अध्यादेश स्वत:ही समाप्त हो गया। अब सरकार इस विधेयक में थोड़ा बदलाव कर मीडिया पर पाबंदी खत्म करने के साथ ही अधिकारियों व नेताओं के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की सीमा 90 दिन करते हुए नया संशोधित विधेयक लाने पर विचार कर रही है।

फिलहाल, यह Ordinance विधानसभा की प्रवर समिति के पास है। प्रदेश के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में पक्ष व विपक्ष के विधायकों को शामिल करते हुए बनी प्रवर समिति में अनौपचारिक रूप से भ्रष्ट नेताओं व अफसरों के नाम सार्वजिनक करने पर दो वर्ष की समाज का प्रावधान खत्म करने, मीडिया में अभियोजन स्वीकृति से पूर्व समाचार छापने पर सजा का प्रावधान समाप्त करने और लोकसेवकों के विरुद्ध व अभियोजन स्वीकृति की अवधि 180 दिन से कम कर 80 दिन करने पर सहमति बन गई है।

राज्य के संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि अध्यादेश समाप्त होने के साथ ही यह कानून खत्म हो गया। सरकार ने इस कानून का कोई उपयोग नहीं किया है। विधेयक प्रवर समिति के समक्ष है। समिति में भेजने का अर्थ यही है कि सरकार संशोधित विधेयक लाएगी। वहीं, प्रवर समिति के अध्यक्ष व राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया का कहना है कि विधेयक पर प्रवर समिति विचार कर रही है। सरकार ने 23 अक्टूबर को विधेयक विधानसभा में पेश किया था, इसके बाद अध्यादेश की उम्र 42 दिन होती है, इस कारण सोमवार को अध्यादेश स्वत: ही समाप्त हो गया।

इधर, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर का कहना है कि कांग्रेस विधानसभा में और बाहर सरकार के काले कानून का विरोध करेगी। सरकार यदि संशोधित विधेयक लाएगी तो उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा।

बसपा विधायक मनोज न्यागली व निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मीडिया पर पाबंदी जैसे प्रावधान विधेयक से हटाने के बाद ही संशोधित Ordinance पर विचार करने दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार सीआरपीसी और आईपीसी में संशोधन Ordinance लेकर आई थी।
-एजेंसी