चिकित्सकीय पेशे में निरंतर अध्ययन व अभ्यास जरूरीः शर्मा

मथुरा। के. डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के सभागार में सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार चिकित्सकों की नैतिकता पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारम्भ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार, प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार गुप्ता आचार्य एवं विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी, विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक डॉ. श्याम बिहारी शर्मा आदि द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने विभिन्न उद्धरणों द्वारा चिकित्सकों में नैतिकता की आवश्यकता, रोगी के प्रति सद् व्यवहार, अपने सहयोगियों से मृदु व्यवहार तथा निरंतर अध्ययन और अभ्यास के लाभ बताते हुए उस पर चलने के मार्ग सुझाए। डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने कहा कि चिकित्सकों का आपसी सामंजस्य, उनकी संवेदनशीलता, जवाबदेही तथा रोगी को उचित परामर्श और उसकी देखभाल का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष महत्व है। सच्चाई तो यह है कि रोगी के साथ डॉक्टर्स का सही व्यवहार और उपचार ही चिकित्सकीय नैतिकता है।

वक्ताओं में शिशु औषधि विशेषज्ञ डॉ. संध्या लता, भेषज विज्ञान के डॉ. दिव्य ज्योति साकिया, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण पद दत्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र पाण्डेय, एनाटोमी के सहायक आचार्य सुधाकर, निश्चेतना विभाग की डॉ. सोनी जसूजा ने चिकित्सकों की नैतिकता पर अपने-अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सभी चिकित्सकों ने माना कि रोगी का सही उपचार और उसकी देखभाल ही चिकित्सकीय नैतिकता है। संगोष्ठी में चिकित्सकों ने कहा कि मरीज और उसके परिचारक को हर बात स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए इससे चिकित्सक तथा मरीज के बीच न केवल सामंजस्य बढ़ता है बल्कि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या भी पैदा नहीं होती।
संगोष्ठी में यह माना गया कि चिकित्सा के क्षेत्र में मरीज का सही उपचार बहुत कुछ उसकी जांच और परीक्षण पर निर्भर करता है लिहाजा किसी भी जांच में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।

संगोष्ठी में सभी चिकित्सकों ने एकमत से चिकित्सक एवं रोगी के मधुर सम्बन्धों को स्वीकार करते हुए यह माना गया कि रोगी की संतुष्टि ही सही मायने में चिकित्सकीय नैतिकता (मेडिकल एथिक्स) है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने संस्कृत के विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से किया। आभार चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने माना।

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