Mission 2019 के लिए अंतिम तैयारी में अड़चनें, जुलाई में मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना

नई दिल्ली। Mission 2019 के लिए बीजेपी व केंद्र सरकार अपनी अंतिम तैयारी में आने वाली अड़चनों को दूर करते हुए जुलाई में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी कर रही है।

Mission 2019 आम चुनाव होने हैं, नरेंद्र मोदी सरकार अभी से इस चुनाव की तैयारी में जुट गई है। पार्टी और सरकार के स्तर से जहां एक तरफ सरकार के कामकाज और आए परिणामों को जनता तक पहुंचाने के लिए तमाम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा है, वहीं संगठन स्तर पर बदलाव की तैयारी हो चल रही है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार जुलाई में यह मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इस मंत्रिमंडल विस्तार या कहें फेरबदल भी कहा जा सकता है। मोदी मंत्रिमंडल में अब तक तीन बार फेरबदल हो चुका है। पहला विस्तार 9 नवंबर 2014 को, दूसरा 5 जुलाई 2016 को और तीसरा विस्तार 3 सितंबर 2017 को हुआ था। मौजूदा समय में मंत्रिमंडल में 76 सदस्य हैं। यह आंकड़ा 82 तक हो सकता है।

पार्टी में वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि कुछ मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है। इन लोगों को संगठन में भेजा जा सकता है। इसे उनके कामकाज से नहीं जोड़ा जा रहा है। पार्टी में उनके काम की अहमियत के चलते ऐसा किया जाएगा। चुनावी साल है और पार्टी कर्मठ नेताओं को जनता के बीच भेजना चाहती है जो पार्टी और सरकार की छवि जनता के बीच बेहतर कर सके जिसका फायदा 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिले।

कहा जा रहा है कि जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो मंत्रिमंडल का विस्तार है वह इस सरकार चौथा और आखिरी विस्तार हो सकता है। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्यों के सियासी समीकरण और सहयोगियों को साधने के लिए शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस संबंध में सहयोगी दलों से भी बातचीत का सिलसिला शुरू किया जाएगा।

बता दें कि पिछले साल सितंबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था। साथ ही एक कैबिनेट रैंक पर सहमति न बनने के कारण शिवसेना की हिस्सेदारी भी मंत्रिमंडल में बढ़ नहीं पाई थी। उस दौरान अन्नाद्रमुक को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने पर चर्चा हुई थी, लेकिन पार्टी में दो धड़ों के बीच मतभेद के चलते इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका था। कहा जा रहा है कि अब संभावित विस्तार में एनडीए के नए साथियों को प्रतिनिधित्व देने और नाराज साथियों को मनाने की कोशिश की जाएगी।

वर्तमान में बीजेपी देश के 21 राज्यों में या तो अपने दम पर या फिर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार चला रही है। ऐसे में केंद्र सरकार जहां अपने कामकाज का बखान करने में लगी है वहीं, पार्टी की राज्य सरकारें भी इस काम में जुट गई हैं। राज्य सरकारों की ओर से भी अपने काम को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

विपक्षी एकता एक नई दिशा में चल पड़ी है, कई दल जो कभी साथ दिखाई नहीं दे सकते थे, ऐसे माहौल में साथ-साथ आ गए हैं ताकि एकजुट होकर बीजेपी को हराया जा सके। हाल के उपचुनाव इसका उदाहरण पेश कर रहे हैं, यानि विपक्ष भाजपा के खिलाफ राज्यों में महागठबंधन बनाने में लगा है।

उधर, बीजेपी को हाल में कुछ बड़े झटके भी लगे हैं। सहयोगी दल टीडीपी ने एनडीए छोड़ दिया है तो शिवसेना आए दिन आंख दिखाता आंख दिखाता चला आ रही है। वहीं, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पासवान के बाद नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने रविवार को एक बैठक के बाद कहा कि लोकसभा या विधानसभा का चुनाव बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व और चेहरा पर लड़ा जाना चाहिए।

बिहार से भी जनता यूनाइटेड के कुछ नेताओं से अभी से Mission 2019 के मद्देनजर बयान देना आरंभ कर दिया है। भाजपा नेताओं का मानना है कि जनता दल के नेताओं का वक्तव्य भाजपा से ज़्यादा जनता दल यूनाइटेड के नेता और कार्यकर्ताओं को संदेश भेजने की क़वायद है कि फ़िलहाल वो नरेंद्र मोदी के सामने पूरी तरह नतमस्तक नहीं हुए हैं।

अब Mission 2019 के लिए अब सात जून को एनडीए के नेताओं जिसमें सभी दलों के विधायक सांसद शामिल होंगे उस पर सबकी निगाहें होंगी कि कौन आख़िर क्या बोलता है।

-Legend News

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