धारा 24ए के तहत अपराधों की कंपाउंडिंग के लिए SEBI की सहमति अनिवार्य नहीं

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि SEBI एक्ट की धारा 24ए के तहत अपराधों की कंपाउंडिंग के लिए बाजार नियामक सेबी की सहमति अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञ निकाय की राय लेना जरूरी है।
इस संदर्भ में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के पास विचाराधीन अपराधों की सुनवाई के फैसले को वीटो करने का कोई अधिकार नहीं है।
सेबी के विचार जानना जरूरी
नियामक व अभियोजन एजेंसी, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) और अदालतों को इसके विचार लेने चाहिए क्योंकि ये विशेषज्ञ निकाय है। शीर्ष अदालत ने कहा कि निवेशकों की सुरक्षा के हित के लिए और प्रतिभूति बाजार की स्थिरता के लिए सेबी के विचार जानना अनिवार्य है। आगे शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘धारा 24ए के तहत दंडनीय अपराधों की कंपाउंडिंग के लिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अदालत को मार्गदर्शन के लिए सेबी के विचार लेने चाहिए।’
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर आया फैसला
शीर्ष अदालत का फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर आया जिसमें सेबी अधिनियम की धारा 24ए के तहत अपराधों की कंपाउंडिंग के लिए प्रकाश गुप्ता के आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता सेबी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दर्ज मामले में विचाराधीन है। निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर धारा 24-ए के तहत याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज कर दिया था।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *