कांग्रेस का “हाथ” पाकिस्‍तान और उसके आतंकियों के साथ, दो बड़े नेताओं ने दिए विवादित बयान

श्रीनगर। कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने कश्‍मीर पर जिस तरह के विवादित बयान दिए हैं, उससे जाहिर होता है कि कांग्रेसी नेताओं की सहानुभूति पाकिस्‍तान, पाकिस्‍तान समर्थित आतंकवाद, अलगाववाद तथा उनके द्वारा पाले जा रहे पत्थरबाजों से है।
एक ओर जहां जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पार्टी के नेता सैफुद्दीन सोज ने एक विवादित बयान दिया है वहीं दिल्‍ली में कांग्रेस नेता और जम्‍मू-कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने ऐसा बयान दे डाला है जिससे पाकिस्‍तानी आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा ने बाकायदा पत्र लिखकर पूरी तरह सहमति जताई है और इस पत्र में गुलाम नबी आजाद का नाम भी लिखा है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आजाद ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार की ‘बाहुबल’ वाली नीति आम लोगों के खिलाफ काम कर रही है क्योंकि 4 आतंकियों को मारने के चक्कर में 20 नागरिक मारे जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने सैफुद्दीन सोज ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि कश्मीर के लोगों की पहली प्राथमिकता आजादी पाना है। सोज ने कहा कि वर्तमान स्थिति में कश्मीर की आजादी इससे जुड़े देशों के कारण संभव नहीं है लेकिन यह जरूर है कि कश्मीर के लोग पाकिस्तान के साथ इसका विलय नहीं कराना चाहते।
सोज ने कहा कि वह निजी रूप से यह कहना चाहते हैं कि कश्मीर के लोगों की पहली प्राथमिकता आजादी है। कश्मीर ना भारत के साथ रहना चाहता है और ना ही यह चाहता है कि पाकिस्तान के साथ इसका विलय कराया जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों के लिए शांतिपूर्ण माहौल की स्थापना जरूरी है, जिससे कि यहां के लोग शांति से रह सकें। सोज ने कहा कि उनके इस बयान का कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है और वह निजी क्षमता से कश्मीर के लोगों के तरफ से यह बातें कह रहे हैं।
यूपीए सरकार में मंत्री रहे हैं सोज
सोज ने यह भी कहा कि सरकार को कश्मीर के सभी पक्षों से बात करनी होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या इन सभी लोगों में हुर्रियत भी शामिल होनी चाहिए, सोज ने कहा कि वह कश्मीर के एक सक्रिय पक्षकार हैं और सरकार को उनसे जरूर बात करनी होगी। बता दें कि सैफुद्दीन सोज केंद्र में यूपीए की सरकार के दौरान मंत्री रह चुके हैं और वह जम्मू-कश्मीर में पार्टी के एक बड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं।
किताब में किया मुशर्रफ का समर्थन
सैफुद्दीन सोज ने कश्मीर के इतिहास और वर्तमान से जुड़ी एक किताब भी लिखी है, जिसे जल्द ही लॉन्च किया जाना है। इस किताब में सोज ने पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के उस बयान का भी समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वोटिंग की स्थितियां होती हैं तो कश्मीर के लोग भारत या पाक के साथ जाने की अपेक्षा अकेले और आजाद रहना पसंद करेंगे।
इसी प्रकार कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता गुलाम नबी आजाद ने मीडिया से कहा है कि कश्‍मीर में आतंकवादियों से अधिक आम लोग मारे जा रहे हैं। तमाम लोग अपनी आंखें खो चुके हैं लेकिन सरकार को उनकी चिंता नहीं है। वह आतंकवादियों की तो गिनती करती है किंतु सुरक्षाबलों से पीड़ित कश्‍मीरियों की गिनती नहीं करती। साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि कश्‍मीर में आतंकवादियों के अलावा काफी संख्‍या में सुरक्षाबलों के जवान भी मारे गए हैं। सोज के इस बयान के बाद बवाल मच गया है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने सोज के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा, ‘जब सोज केंद्र में मंत्री थे और JKLF ने सोज की बेटी का अपहरण किया था तब उन्हें केंद्र से मदद मिली थी। ऐसे लोगों की मदद करने का कोई फायदा नहीं। जो भी भारत में रहना चाहता है वह यहां के संविधान को मानते हुए यहां रह सकता है। अगर कोई परवेज मुशर्रफ को पसंद करता है तो उनका एक तरफ का टिकट (पाकिस्तान जाने का) कटवा दिया जाए।’
कांग्रेसी नेताओं द्वारा दिए गए इन राष्‍ट्रविरोधी बयानों की अन्‍य लोगों द्वारा भी तीखी निंदा की जा रही है।
-एजेंसी

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