मृतक इंद्रकांत के घर महोबा जाने से पहले ही हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेता

कानपुर। महोबा के विस्फोटक व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था, वायरल वीडियो के दूसरे ही दिन व्यापारी गंभीर हालत में कार में मिले थे। रविवार को उनकी कानपुर के अस्पताल में मौत हो गई थी।
इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद अब यूपी की सियासत गरमाई हुई है। राजनीतिक पार्टियों ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। इस बीच कांगेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू को पुलिस ने महोबा जाने से पहले ही हिरासत में ले लिया। कांग्रेस विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा और अजय लल्लू, विस्फोटक व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी के परिवार से मिलने जा रहे थे। कांग्रेस के नेताओं को घाटमपुर पुलिस ने आगे जाने से रोक लिया। पुलिस ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अराधना मिश्रा को हिरासत में लिया है।
कबरई के जवाहर नगर में रहने वाले इंद्रकांत त्रिपाठी विस्फोटक व्यापारी थे। इंद्रकांत त्रिपाठी झांसी-मिर्जापुर हाइवे पर अपनी कार में गंभीर हालत में पाए गए थे। उनके गले को चीरते हुए गोली निकल गई थी। कानपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 5 दिनों से इलाज चल रहा था। शुक्रवार और शनिवार को उनकी हालत बेहद गंभीर थी, रविवार को इलाज के दौरान हो गई। रविवार देर रात पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
‘पुलिसिया राज में जनता का उत्पीड़न’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना है, ‘एक व्यक्ति जो अपना वीडियो वायरल करता है, जिसने स्पष्ट रूप से कहा है कि मेरी जान को खतरा है। महोबा के पुलिस कप्तान के द्वारा 6 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई, यह पुलिसिया राज है। पिछले समय से इस बात का अंदेशा रहा, अब तो स्पष्ट हो गया है कि सरकार, पुलिस, अधिकारी लगातार गठजोड़ करके उत्तर प्रदेश की जनता का उत्पीड़न करने और परेशान करने का काम कर रहे हैं।’
‘जिनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया उन्हें जेल क्यों भेजा’
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज वो व्यापारी हम लोगों के बीच नहीं रहा है, जिसकी हत्या हो गई है। मुकदमे दर्ज हुए अब तक क्यों कार्यवाही नहीं हुई। हमारे मुख्यमंत्री आखिर चुप क्यों हैं। जिनके खिलाफ मुकदमा हुआ वे जेल क्यों नहीं भेजे गए। आम आदमी सुरक्षित क्यों नहीं है, किसी की जान की कीमत नहीं है।
‘यूपी में अपराध क्यों नहीं रुक रहा है’
विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा ने कहा कि महोबा में व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने पहले ही वीडियो जारी करके दे दिया था। इसके बाद मुकदमा लिखा गया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह इस बात का प्रमाण है कि यूपी में अपराध रुक क्यों नहीं रहा है, इसलिए कि अपराधियों का संरक्षण सत्ता में बैठे लोगों को है। ऐसे में यदि अपराधी खुद प्रशासन में बैठा हो तो अपराध रुक नहीं सकता है।
‘जिस तरह से हमें रोका यह असंवैधानिक है’
अराधना मिश्रा ने कहा, ‘जिस पुलिस अधिकारी पर व्यापारी ने आरोप लगाया था, उस समय रहते कार्यवाही की गई होती, स्वयं मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया होता तो यह घटना होने से बचाई जा सकती थी। प्रियंका गांधी की अपील पर हम लोग उस परिवार को सांत्वना देने जा रहे थे। मैं और प्रदेश अध्यक्ष अयज कुमार लल्लू के साथ जा रहे थे। हमारे पास न कार्यकर्ता और न ही भीड़ है। इसके बाद भी पुलिस ने हमें जबरन रोक लिया और आगे नहीं जाने दे रही है। जिस तरह से हमें रोका यह पूरी तरह से असंवैधानिक है लेकिन कांग्रेस पार्टी डरने वाली नहीं है, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।’
क्या कहा था वायरल वीडियो में
विस्फोटक व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी का बीते 7 सितंबर को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें व्यापारी ने तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर 6 लाख की रिश्वत मांगने और झूठे मुकदमे में फंसाने का अरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मेरी जान को खतरा है, किसी भी वक्त मुझ पर हमला हो सकता है। इस वायरल वीडियो के अगले ही दिन इंद्रकांत त्रिपाठी घायल हालत में पाए थे।
व्यापारी पर हमले के बाद तत्कालीन एसपी हुए थे निलंबित
विस्फोटक व्यापारी के वायरल वीडियो और गोली लगने के बाद 9 सितंबर को महोबा ते एसपी मणिलाल पाटीदार को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को कबरई थाना प्रभारी समेत चार पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया था। बीते शुक्रवार को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार, कबरई थाना प्रभारी देवेंद्र शुक्ला, विस्फोटक व्यापारी सुरेश सोनी पर जान से मारने का प्रयास, सजिश रचने और रंगदारी मांगने की धाराओं का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाई जाएगी।
व्यापारी के भाई ने प्रशासन पर लगाए आरोप
मृतक के भाई रविकांत त्रिपाठी के मुताबिक यहां पर पोस्टमॉर्टम के लिए बॉडी आई हुई है। मैजिस्ट्रेट आए और कहने लगे कि मैं पंचनामा करूंगा। कमरे में इंस्पेक्टर और मैजिस्ट्रेट चले गए। कमरे में क्या लिख लिया कुछ नहीं बताया और जाने लगे। न तो बॉडी खोली गई न ही कुछ हुआ। हमें कुछ बता भी नहीं रहे हैं कि क्या कहा, क्या राय दी। उन्होंने कहा कि पूरा प्रशासन एकजुट हो गया है। एसपी महोबा के खिलाफ रिपोर्ट है, इसलिए हमें हर तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी कराई जाए।
-एजेंसियां

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