BJP के लिए मुफीद साबित हुआ कांग्रेस का लिंगायत कार्ड

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में BJP की जीत कांग्रेस और जेडीएस को जितना परेशान करने वाली है, उतना ही खुद उसके लिए भी हैरान करने वाली है।
कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने चुनाव से पहले लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा का प्रस्ताव पारित किया था। माना जा रहा था कि इससे BJP का परंपरागत वोटर कहे जाने वाले लिंगायतों का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ जा सकते है।
ऐसे में यह BJP के लिए बड़ा नुकसान होगा, लेकिन नतीजे आए तो पूरी थिअरी ही पलट गई।
लिंगायत तो BJP के साथ दिखे ही अन्य समुदायों का वोट भी बीजेपी को खूब मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो लिंगायतों में कांग्रेस के सेंध न लगा पाने की बड़ी वजह यह रही कि आम लिंगायत लोगों को लगता था कि इससे उन्हें सीधे तौर पर कोई फायदा नहीं होगा। कर्नाटक की राजनीति के जानकारों के मुताबिक अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने का फायदा सीधे तौर पर लिंगायत समुदाय से जुड़े ट्रस्टों को होता। इससे उन्हें अपने संस्थानों के संचालन में काफी हद तक स्वायत्ता मिल सकती थी, लेकिन आम लोग इसे बड़े फायदे के तौर पर नहीं देख रहे थे।
अल्पसंख्यक दर्जे पर लिंगायतों ने दी CM को तवज्जो
ऐसे में उन्हें बड़ा फायदा अपने समुदाय के सीएम कैंडिडेट येदियुरप्पा को जिताने में लगा। इसके अलावा कांग्रेस के इस कार्ड से लिंगायत तो साथ आए नहीं, इसके उलट अन्य हिंदू समुदायों ने इसे बंटवारे की राजनीति के तौर पर देखा। BJP इस ऐंगल से सूबे में प्रचार भी कर रही थी कि यह हिंदू समाज को बांटने की साजिश है। माना जा रहा है कि BJP के इस प्रचार का लोगों में असर हुआ और उसे बड़े पैमाने पर समर्थन हासिल हुआ।
दलित बहुल सीटों पर भी BJP सबसे आगे
दलितों की बहुलता वाली सबसे ज्यादा 25 सीटों पर बीजेपी जीत की ओर है, जबकि कांग्रेस 24 सीटें जीत सकती है। जेडीएस को 15 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की ओर से दलित सीएम का मुद्दा उठाए जाने का असर भी इन इलाकों में दिखा है। इसके अलावा आरएसएस की ओर से आदिवासियों और दलितों के बीच काम का भी संभवत: BJP को लाभ मिला।
-एजेंसी

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