नेताओं की गिरफ्तारी के बाद विश्वसनीयता के संकट से गुजर रही है कांग्रेस

कांग्रेस के दो कद्दावर नेता सीबीआई और ईडी की गिरफ्त में आ चुके हैं जबकि कुछ और पार्टी नेताओं पर शिकंजा कसता दिख रहा है। कांग्रेस संकट में है जो लोकसभा चुनाव में करारी हार और फिर राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से बढ़ता जा रहा है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को गुरुवार को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उधर, कर्नाटक में पार्टी के दिग्गज चेहरे डी के शिवकुमार को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में पार्टी में अविश्वास का माहौल गहराने लगा। यूं तो पार्टी ने इन कार्यवाहियों को राजनीति से प्रेरित बताया है लेकिन यह स्पष्ट हो चुका है कि कांग्रेस विश्वसनीयता के संकट से गुजर रही है।
कसता जा रहा है शिकंजा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को अगुस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले में कथित ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को 6 दिन की हिरासत में भेज दिया। ईडी ने कांग्रेस के एक और कद्दावर नेता और गुजरात से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल से गुरुवार को दोबारा पूछताछ की। फैसल स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग केस में कथित भूमिका के चलते ईडी के निशाने पर हैं।
विधानसभा चुनावों से पहले परेशानी
इन सारी घटाओं के बीच कांग्रेस पार्टी कम-से-कम बयानों के स्तर पर अपनी साहसिक छवि पेश कर रही है और कह रही है कि वह प्रताड़ित करने के प्रयासों के आगे सच बोलने से नहीं रुकेगी। हालांकि ऐसा जान पड़ता है कि हालिया गतिविधियों ने पार्टी की साख को झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा में विधानसभा के चुनावों से ठीक पहले बहुत कमजोर कर दिया है क्योंकि बीजेपी एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे को भुनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। आर्टिकल 370 हटाए जाने पर कांग्रेस नेताओं के एक-दूसरे के विपरीत विचार सामने आ चुके हैं। अब भ्रष्टाचार के मामलों में नेताओं पर कस रहे शिकंजे से चुनावी राज्यों में पार्टी नेता पाला बदलने लगे हैं।
हाथ से निकल रहा बीजेपी को घेरने का मौका
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार की असफलताओं को लेकर कांग्रेस के हमले की धार भी उसके नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले में हुई कार्रवाइयों के कारण कुंद हो रही है। आर्थिक सुस्ती ने कांग्रेस को मोदी सरकार पर हमले का बड़ा मौका दिया था, लेकिन कांग्रेसियों की गिरफ्तारी को बीजेपी इस रूप में पेश करने लगी है कि अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में वह कांग्रेस के मुकाबले फिर भी ठीक है क्योंकि उसके शासनकाल में कम-से-कम भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा।
कांग्रेस में दरार बढ़ने का डर
सत्ताधारी बीजेपी को दिग्गज नेताओं के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यवाहियों से कांग्रेस को वंशवादी और भ्रष्टाचार की गंगोत्री साबित करने का मौका मिल रहा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने संकेत दिया है कि पार्टी के सामने चुनौतियां सिर्फ चुनाव के वक्त पैदा हुई मुश्किलों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पार्टी की दिशा और इसके नेतृत्व को लेकर कुछ गंभीर और मौलिक सवाल खड़े करेंगी।
इस बीच मध्य प्रदेश जैसे एक बड़े राज्य में भी कांग्रेस के बीच दरार बढ़ने का डर है जहां पार्टी सत्ता में है।
-एजेंसियां

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