कांग्रेस ने जानबूझकर वोटों के लिए “हिंदू आतंकवाद” शब्‍द ईजाद किया: भाजपा

नई दिल्‍ली। बीजेपी ने आज आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जानबूझकर हिंदू आतंकवाद शब्द का यूज किया और वोट के लिए हिंदू आतंकवाद की थ्योरी पेश की थी। गौरतलब है कि अदालत ने समझौता ब्लास्ट मामले में चारों आरोपियों- स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी को 20 मार्च को बरी कर दिया था।
समझौता ब्लास्ट बम धमाका मामले में इन आरोपियों को बरी करने वाली एक अदालत द्वारा इस मामले में विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्य की कमी की टिप्पणी सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है।
बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस ने वोट के लिए हिंदू आतंकवाद का नारा दिया था।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद शब्द की साजिश रची। उन्होंने कहा, ‘यूपीए सरकार ने जानकारियों को नजरअंदाज किया। आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश नहीं किए गए। 2007, 2008, 2009 में जांच हुई लेकिन सबूत नहीं सौंपे गए। हिंदू टेरर की थ्योरी गढ़कर इस समाज को कलंकित करना, यह इतिहास में पहली बार हुआ। इसकी जिम्मेदारी यूपीए और कांग्रेस को लेना होगी। मरने वाले आम लोग थे। जो सही मायने में दोषी थे उनको सजा नहीं मिली। मासूमों की जान चली गई।’ जेटली ने कहा कि इस तरह के 3-4 मुकदमे बनाए गए, जिसमें से एक भी टिक नहीं सका।
उन्होंने कहा कि हिंदू टेरर की थ्योरी बनाने के लिए गलत लोगों को पकड़ लिया गया। जजमेंट में डीटेल तर्क दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास धमाका हुआ। उस वक्त रेलगाड़ी अटारी जा रही थी जो भारत की तरफ का आखिरी स्टेशन है। इस बम विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हिंदुओं को आतंकवादी मानने वाले लोग अब इस धर्म के प्रति श्रद्धा दिखाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे समाज को आतंकवादी बता देने को इस समाज के लोग सहन नहीं करेंगे। कांग्रेस महसचिव प्रियंका गांधी के अयोध्या दौरे पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि अच्छी बात है लोग अयोध्या जाएं और इस बात को स्वीकार करें कि यहीं राम जन्मभूमि है।
फैसले में जज ने क्या कहा
एनआईए अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा, ‘मुझे गहरे दर्द और पीड़ा के साथ फैसले का समापन करना पड़ रहा है क्योंकि विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव की वजह से हिंसा के इस नृशंस कृत्य में किसी को गुनहगार नहीं ठहराया जा सका। अभियोजन के साक्ष्यों में निरंतरता का अभाव था और आतंकवाद का मामला अनसुलझा रह गया।’ न्यायाधीश ने कहा कि आतंकवाद का कोई महजब नहीं होता क्योंकि दुनिया में कोई भी मजहब हिंसा का संदेश नहीं देता।
‘संदेह कभी सबूत की जगह नहीं ले सकता’
उन्होंने 28 मार्च को सार्वजनिक किए गए विस्तृत फैसले में कहा है, ‘अदालत को लोकप्रिय या प्रभावी सार्वजनिक धारणा अथवा राजनीतिक भाषणों के तहत आगे नहीं बढ़ना चाहिए और अंतत: उसे मौजूदा साक्ष्यों को तवज्जो देते हुए प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों और इसके साथ तय कानूनों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘चूंकि अदालती फैसले कानून के मुताबिक स्वीकार्य साक्ष्यों पर आधारित होते हैं इसलिए ऐसे में यह दर्द और बढ़ जाता है जब नृशंस अपराध के साजिशकर्ताओं की पहचान नहीं होती और वे सजा नहीं पाते।’ न्यायाधीश ने कहा कि, ‘संदेह चाहे कितना भी गहरा हो, साक्ष्य की जगह नहीं ले सकता।’
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »