राजस्थान में भी पंजाब का पंच दोहरा सकती है कांग्रेस

जयपुर। पंजाब कांग्रेस में लंबी सियासी खींचतान के बाद जहां अब दलित सिख नेता चरण सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया गया है वहीं राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में भी इसके बाद लगातार हलचलें तेज हैं। राजस्थान में बढ़ी सुगबुगाहटों की वजह यह भी है कि बीते शुक्रवार यानी 17 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मैराथन बैठकें कीं। इसी बीच अगले दिन पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि राजस्थान और सचिन पायलट के संबंध में भी पार्टी कोई बड़ा फैसला ले सकती है। उल्लेखनीय है कि इस साल राहुल गांधी और सचिन पायलट की इस तरह की यह पहली बैठक थी लिहाजा राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
फेरबदल 2024 लोकसभा चुनावों के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अब 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नए समीकरण बैठा रही है। जानकारों की मानें तो कांग्रेस अपनी प्रदेश की सरकारों में फेरबदल 2024 लोकसभा चुनावों के लक्ष्यों को ध्यान में रख रही है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना है कि ‘राहुल गांधी की योजना यह है कि 2024 लोकसभा चुनावों को ध्यान मे रखते हुए ही राज्यों में फेरबदल किए जाएं। अगर कोई बदलाव होता है और पायलट की राजस्थान सरकार में वापसी होती है तो इसे अगले आम चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारी के तौर पर देखा जाना चाहिए।’
राजस्थान पर पूरा फोकस
जानकारों की मानें तो राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस सीधे तौर पर बीजेपी को टक्कर दे रही है। ऐसे में इन महत्वपूर्ण प्रदेशों में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी की ओर से सोच समझकर फैसला लिया जा रहा है। यह कोशिश की जा रही है कि राज्यों में पार्टी में अलगाव ना दिखे और मजबूती के साथ पार्टी लोकसभा चुनाव में अपना प्रतिनिधित्व कर सके।
सचिन पायलट ने परफॉर्मेंस से कह दी अपनी बात
उल्लेखनीय है कि हाल ही हुए प्रदेश पंचायती राज चुनाव में सचिन पायलट की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। पार्टी को जीत का लक्ष्य दिलाने के लिए पायलट खुद मैदान में उतरे थे। जोधपुर समेत कई अन्य जिलों में जाकर उन्होंने जहां केंद्र की नीतियों पर हमला बोला। वहीं कांग्रेस के जनहित को समझाने की कोशिश भी आम जनता के बीच की। हालांकि पायलट ने 17 सितंबर को हुई बैठक के विषय में अभी अपनी कोई बात नहीं रखी है। लेकिन चुनाव के दौरान भीड़ जुटाने से लेकर जीत हासिल करने तक में अपना शक्ति प्रदर्शन जरूर कर दिया।
पायलट की बहाली के संकेत
उल्लेखनीय है कि पायलट जुलाई 2020 तक राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री थे। हालांकि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बागी रवैया अपनाने के बाद उनसे ये दोनों ही पद वापस ले लिए गए थे। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक, राहुल और सचिन की बैठक के दौरान राजस्थान में पायलट की बहाली को लेकर गंभीर रूप से चर्चा की गई। वहीं उनकी बहाली को आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मजबूती देने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन फिलहाल यह तय नहीं है कि पार्टी में किस तरह पायलट को नई भूमिका दी जाएगी।
-एजेंसियां

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