के. डी. हॉस्‍पिटल में जटिल टोटल Hip-Replacement सर्जरी

मथुरा। हर इंसान की इच्छा होती है कि वह बिना किसी की मदद के चले-फिरे, जहां दिल करे वहां आ-जा सके। कुछ माह पहले तक फिरोजपुर, पलवल (हरियाणा) निवासी मीरा ने यह मान लिया था कि वह अब बिना सहारे के कभी नहीं चल पाएगी लेकिन के. डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्‍पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के हड्डी रोग विशेषज्ञ गोल्ड मेडलिस्ट डा. प्रतीक अग्रवाल ने मीरा के बाएं पैर की टोटल Hip-Replacement सर्जरी कर उसके मायूस चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। अब मीरा बिना सहारे के चल-फिर रही है।

ज्ञातव्य है कि मीरा जब 12 साल की थी तभी छत से गिर जाने के चलते उसका बांया पैर चोटिल हो गया था। इतना ही नहीं, उसका बांया पैर छोटा भी हो गया था। बांए पैर से कमजोर मीरा बिना किसी सहारे के चल-फिर भी नहीं पाती थी। बांया पैर काफी निःशक्त होने की वजह से खड़े होते ही वह गिर जाती थी। आखिरकार उसके परिजनों ने दिल्ली तथा हरियाणा के कई चिकित्सालयों में उसे दिखाया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। आखिरकार समाचार पत्रों के माध्यम से उसके परिजनों को के. डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्‍पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर और उसके विशेषज्ञ डाक्टरों के बारे में पता चला।

मीरा बताती हैं कि वह अपने परिजनों के साथ के. डी. हॉस्‍पिटल आई और डा. प्रतीक अग्रवाल से मिली। मीरा के पैर का एक्सरा कराने के साथ अन्य जांचें की गईं। एक्सरा और अन्य जांचों का अवलोकन करने के बाद डाक्टरों की टीम ने Hip-Replacement आपरेशन करने का निर्णय लिया। आखिरकार एक जून को के. डी. हॉस्‍पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. प्रतीक अग्रवाल, डा. वरुण, निश्चेतना विशेषज्ञ डा. निझावन आदि की टीम ने बाएं पैर की टोटल हिप-रिप्लेसमेंट सर्जरी करने में सफलता हासिल की। अब मीरा बिना किसी की मदद लिए चल-फिर पाने में सक्षम है। मीरा के पति का कहना है कि के.डी. हॉस्‍पिटल के डाक्टर्स ने उसकी पत्नी को अपने पैरों पर खड़ा कर दिखाया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज की इस महंगाई के दौर में जहां सामान्य सी बीमारी में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं वहीं उनकी पत्नी बहुत कम पैसे में ही चल-फिर पाने में सक्षम हो गई है।

डाक्टर्स की इस सफलता पर आर. के. एजुकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल और प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने खुशी जताते हुए टीम को बधाई दी तथा कहा कि मीरा को उसके पैरों पर खड़ा करना वाकई पुण्य का कार्य है। डा. अग्रवाल ने कहा कि के. डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्‍पिटल से कोई भी मरीज निराश नहीं जाना चाहिए।

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