नेहरू पर टिप्पणी: दलाई लामा ने कहा, कुछ गलत कहा है तो माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। हाल ही में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर विवादित टिप्पणी करके विवादों में फंसे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि यदि उन्होंने कुछ गलत कहा है तो वे माफी मांगते हैं।
उन्होंने कहा कि मेरे बयान से विवाद पैदा हुआ है। यदि इसमें कुछ गलत है तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। गौरतलब है कि गोवा में मैनेजमेंट छात्रों के बीच तिब्बती धर्मगुरु ने कहा था कि महात्मा गांधी मोहम्मद अली जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे ताकि भारत का विभाजन न हो। यदि नेहरू गांधी की बात मान लेते तो देश का विभाजन नहीं होता।
दलाई लामा ने कहा था कि नेहरू अपने बारे में सोचने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने महात्मा गांधी की बात को मानने से इंकार कर दिया था। इसी के चलते भारत को विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी।

तिब्बती चीन का हिस्सा बनने को तैयार
तिब्बती धर्मगुरु ने आज ये भी कहा कि अगर तिब्बतियों की संस्कृति को सुरक्षित रखने की पूरी गारंटी दी जाती है तो तिब्बती चीन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने यहां आयोजित ‘धन्यवाद कर्नाटक’ कार्यक्रम में कहा, “तिब्बती अपनी स्वतंत्रता नहीं मांग रहे हैं। हम चीनी जनवादी गणराज्य के साथ बने रहने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने लिए पूरा अधिकार दिया जाए।”
इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) ने किया। यह कार्यक्रम ‘धन्यवाद भारत-2018’ का एक हिस्सा है, जिसका आयोजन भारत में रह रहे तिब्बती समुदाय ने देश में अपने 60 वर्षो के निर्वासन को चिन्हित करने के लिए किया है।
नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा, “बौद्ध धर्म का पालन करने वाले कई चीनी नागरिक तिब्बती बौद्ध धर्म को लेकर उत्सुक है, क्योंकि इसे वैज्ञानिक पद्धति माना जाता है।”
पूर्वोत्तर तिब्बत के तक्तसेर गांव में पैदा हुए दलाई लामा को दो साल की उम्र में ही धर्मगुरु की मान्यता दी गई। माना गया कि उनका 13वें दलाई लामा थुबतेन ग्यातो के रूप में पुनर्जन्म हुआ है। वह वर्ष 1959 में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद भारत चले आए।
चीन ने वर्ष 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया और हजारों तिब्बतियों को अपना पहाड़ी देश छोड़कर भारत के हिमाचल प्रदेश में शरणार्थी के रूप में बसने को मजबूर होना पड़ा।
-एजेंसियां

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