इस तेजी के लिए कानून मंत्री किरण रिजिजू को CJI ने कहा…शुक्रिया

नई दिल्‍ली। स्‍वतंत्रता के 75 साल गुजर जाने के बावजूद आज भी ऐसे मामले सामने आते हैं जहां दशकों तक मुकद्दमेबाजी चलती है। फैसला आते-आते एक पक्ष काल के गाल में समा जाता है, मगर जीते जी न्‍याय नहीं हो पाता। इसका दोष अक्‍सर जजों की कमी को दिया जाता है। काफी देर बाद ही सही, इस दिशा में तेजी नजर आ रही है। यह बदलाव केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू के मातहत आया है। ऐसा भारत के प्रधान न्‍यायाधीश एनवी रमना भी मानते हैं। उन्‍होंने रिजिजू का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट जजों की नियुक्ति के लिए नौ नाम महज छह दिन में बिना किसी कानाफूसी के क्लीयर कर दिए। रमना ने कहा कि हाई कोर्ट कोर्ट में खाली पड़े कम से कम 90% पद अगले महीने तक भर जाएंगे।
सीजेआई को रिजिजू से और है उम्‍मीद
सीजेआई की अध्‍यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 12 हाई कोर्ट्स में जजों की खातिर 68 नाम भेजे हैं। सीजेआई रमना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस एएम खानविलकर के कॉलेजियम ने कुल 113 नामों में से 68 को छांटा है। इनमें से 10 महिलाएं हैं। सीजेआई ने उम्‍मीद जताई है कि इन नामों को भी उसी रफ्तार से मंजूरी दी जाएगी, जैसे सुप्रीम कोर्ट जजों के लिए दी गई थी। कार्यक्रम में रिजिजू भी मौजूद थे जब सीजेआई अपनी बात रख रहे थे।
‘अदालतों में जजों की भारी कमी’
पिछले महीने संसद के मॉनसून सत्र में भी हाई कोर्ट्स में जजों की कमी से जुड़ा मसला उठा था। एक प्रश्‍न के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने कमी की बात स्‍वीकार की थी। सरकार ने बताया था कि पिछले एक साल में 80 जजों की नियुक्ति करने की सिफारिश की गई, मगर सिर्फ 45 ही नियुक्‍त हो पाए। कुछ-कुछ हाई कोर्ट्स तो ऐसे हैं जहां जजों के आधे से ज्‍यादा पद खाली पड़े हैं। तब के आंकड़ों के अनुसार देशभर की हाई कोर्ट्स में 1,098 जज होने चाहिए मगर 645 ही काम कर रहे थे।
किन हाई कोर्ट्स में सबसे ज्‍यादा पद खाली?
इलाहाबाद हाई कोर्ट 160 94
दिल्‍ली हाई कोर्ट 60 30
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट 85 46
हर हाई कोर्ट में डेढ़ लाख से ज्‍यादा केस लंबित
अदालतों में लंबित मामलों का अंबार लगा है। 2018 का एक अनुमान बताता है कि निचली अदालतों में 2.6 करोड़ मामले लंबित पड़े हुए हैं। उस समय हर हाई कोर्ट में औसतन 1.65 लाख मुकदमे लंबित होने का अनुमान लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अप्रैल में लंबित मामलों के निपटान के लिए ‘एड हॉक जजों’ की नियुक्ति पर फैसला सुनाते हुए गाइडलाइंस जारी की थीं। अदालत ने केंद्र और हाई कोर्ट से रिपोर्ट मांगते हुए सुनवाई की अगली तारीख दे दी थी। अदालत ने सभी हाई कोर्ट्स में लंबित मामले निपटाने के लिए ‘एड हॉक जजों’ की नियुक्ति का सुझाव दिया था।
जजों की नियुक्तियों में क्‍यों आती है परेशानी?
केंद्र ने अपने जवाब में कहा था कि जजों की नियुक्ति एक ‘जटिल प्रक्रिया’ है। सरकार का कहना था कि जजों की नियुक्तियों को लेकर केंद्र और राज्‍य सरकार के बीच कई तरह की बातचीत होती है। सरकार ने तब कहा था कि जजों की नियुक्तियां कब तक हो पाएंगे, कहना मुश्किल है। हालांकि अब सीजेआई के बयान से लगता है कि इस दिशा में अगले महीने तक खासी प्रगति हो सकती है।
कैसे होती है सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स के जजों की नियुक्ति?
भारत में उच्‍च अदालतों में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए कॉलेजियम का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्‍ठ जजों का एक कॉलेजियम होता है। इसकी अध्‍यक्षता सीजेआई करते हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स में जजों की नियुक्तियों के नाम कॉलेजियम अपने स्‍तर से शॉर्ट-लिस्‍ट करके विधि मंत्रालय को भेजता है। सरकार चाहे तो एक या ज्‍यादा नामों पर पुनिर्विचार के लिए वापस भेज सकती है। बहरहाल, सभी नामों पर चर्चा के बाद मंत्रालय प्रधानमंत्री को नाम भेजता है। प्रधानमंत्री अपनी राय के साथ राष्‍ट्रपति को नियुक्ति की सिफारिश करते हैं। राष्‍ट्रपति के मंजूरी देने के बाद नियुक्ति हो जाती है।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *