सीबीआई मामले की सुनवाई से CJI Gogoi ने खुद को अलग किया

नई दिल्‍ली। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति मामले की सुनवाई से CJI Gogoi ने खुद को अलग कर लिया, इस याचिका पर 24 जनवरी को दूसरी बेंच सुनवाई करेगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने खुद को अलग करने का तर्क देते हुए कहा कि वह अगले सीबीआई निदेशक का चयन करने वाली चयन समिति की बैठक का हिस्सा होंगे। अब इस याचिका पर 24 जनवरी को दूसरी बेंच सुनवाई करेगी।

याचिका में सीबीआई के अतंरिम निदेशक के तौर पर एम नागेश्वर राव की नियुक्ति को उचच्तम न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका में सीबीआई निदेशक के चुनाव को शॉर्टलिस्ट करने, चुनाव करने और नियुक्ति करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की गई है।

गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने राव की नियुक्ति को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। 16 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई थी। जिसमें उनकी तरफ से वकील प्रशांत भूषण पेश हुए थे और उन्होंने मामले पर 18 जनवरी को सुनवाई करने के लिए कहा था जिसपर अदालत ने कहा था कि अगले हफ्ते ही इसपर सुनवाई होगी।

सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति होने तक सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राव को 10 जनवरी को अंतरिम प्रमुख का प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने आलोक कुमार वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य की उपेक्षा के आरोपों के कारण जांच एजेंसी के प्रमुख पद से हटा दिया था।

इस समिति में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी मौजूद थे।

सीबीआई के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के स्पेशल डाइरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। जांच एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों की आपसी लड़ाई ने इतना तूल पकड़ा कि मामले में सीवीसी और सरकार को दखल देना पड़ा। सीवीसी की सिफारिश पर सरकार ने दोनों अधिकारियों के अधिकार छीनते हुए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया।
वहीं, खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। वर्मा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उनके पद पर शर्तों के साथ बहाल कर दिया। कोर्ट ने वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को सरकार के फैसले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। साथ ही कहा कि वर्मा अपने पद पर बने रहेंगे लेकिन कोई बड़ा फैसला नहीं करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भ्रष्टाचार का यह मामला चयन समिति के समक्ष पेश हुआ। इस बैठक में प्रधान न्यायाधीश की तरफ से जस्टिस एके सीकरी शामिल हुए। समिति ने अपने 2-1 के फैसले में वर्मा को उनके पद से हटा दिया।

-एजेंसी

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