आगरा के विकास को सर्वाधिक उपेक्षित किया सरकाराें ने

Civil Society ने कहा कि जेबर में सत्‍ताधारी दल के राजनीतिज्ञों के परिवारों द्वारा इंटरनेशनल एअरपोर्ट के नाम पर बड़े पैमाने पर ग्रामीणों से खरीदी गई ज़मीन ने हमारा संशय बढ़ाया और हम इस संदर्भ में आगे बढ़े

आगरा। राजनैतिक परिवर्तन और राजनैतिक दलों का सत्‍ता में आना जाना लोकतंत्र में एक सामान्‍य प्रक्रिया है। जनमानस अपेक्षा करता है कि राजनैतिक दल जिन वायदों को उनके बीच करके वोट मांग कर सत्‍ता में पहुंचे हैं, वे उन्‍हें पूरा भी करें किन्‍तु संयोग से आगरा के नागरिकों के साथ केन्‍द्र और राज्‍य में सत्‍ता पर काबिज दल न्‍याय नहीं कर सका।

स्‍टार प्रचारक और पी एम पद के दावेदार के रूप में श्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि अगर सरकार बनी तो आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनवायेंगे किन्‍तु ग्रीन फील्‍ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया जाना तो दूर 2014 से 2019 आ गया है पुराने बने सिविल एन्‍कलेव की शिफ्टिंग की मनमोहन सरकार के काल में शुरू योजना तक पूरी नहीं हो सकी है।

श्री मोदी आगरा में खुद कह कर गये थे कि आगरा टूरिज्‍म के धंधे की संभावना वाला महानगर है और इस लिये इंटरनेशनल एयरपोर्ट यहां की जरूरत है। जब सिविल सोसयटी को सत्‍ता दल से जुड़े राजनीतिज्ञों के परिवारों द्वारा जेबर में बड़ी संख्‍या में जमीनें खरीदने के साथ ही वहां ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने की चर्चा प्रारंभ होती मिली तो सोसायटी को आगरा के हित में इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को विवश होना पडा। यह अत्‍यंत खर्चीला कदम है किन्‍तु केन्‍द्र के साथ ही राज्‍य सरकार के मत्रियों के ‘लंदन लुकिंग-टोक्‍यो टाकिंग’ किस्‍म के व्‍यवहार ने अन्‍य कोई विकल्‍प ही नहीं छोडा।

सिविल सोसायटी की मजबूरी का अहसास इसी बात से किया जा सकता है कि सत्‍ता दल के विधान सभा में सचेतक पद को सुशोभित करने वाले आगरा के लोकप्रिय विधायक तक को सरकार से कहीं ज्‍यादा कोर्ट की भागदौड़ करनी पड़ी। हम विधायक को व्‍यवहारिक मानते हैं क्‍योंकि जानते हैं कि अगर वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने नहीं पहुंचते तो उनकी सरकार तो गंगाजल पाइप लाइन डलवाने की बाधा दूर करने की स्‍थिति में थी। क्‍या यह गैर जिम्‍मेदाराना नहीं है कि चार साल में भारत सरकार आगरा को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले ताज ट्रिपैजियम जोन को तर्क संगत ऐसी विधिक नीति तक नहीं दे सकी जिससे ‘ताजमहल ‘ के शहर में थमा हुआ विकास और काम धंधे गति पकड़ सकते।

आगरा के उद्यमियों के प्रमुख संगठन के पूर्व सरकारों के समय सक्षम साबित होते रहे नेतृत्‍वकर्ता वर्तमान में निहायत अक्षम साबित हुए हैं। वे दिल्‍ली और लखनऊ में तमाम भागदौड़ के बावजूद वन , पर्यावरण मंत्रालय मौसम परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा जारी व्‍हाइट, औरेंज, ग्रीन और रेड जोन’ सिस्‍टम में कोई भी बदलाव नहीं करवा सके जिससे कि आगरा के औद्योगिक विकास का रुका क्रम शुरू हो सकता।

सिविल सोसायटी स्‍थानीय समाचार पत्रों और जनसूचना के अधिकार के तहत मांगी जाती रही सूचनाओं के आधार पर मानने को विवश है कि ‘ताज महल सहित आगरा के सभी पुरास्‍मारकों’ की सबसे ज्‍यादा बदहाली पिछले तीन सालों में रही है। ताजमहल पर तो लगता है कि सरकारी तंत्र संरक्षित अराजकता कायम है। गैर जरूरी व्‍यवस्‍थाओं को ताजमहल के दर्शकों पर जमकर थोपा जा रहा है।

सिविल सोसायटी का दावा है कि आगरा के नाम पर विश्‍व बैंक, एशियाई विकास बैंक से कर्ज तथा बडी कपनियों के सी एस आर फंडों से बडी मात्रा में धन जरूर लिया गया है किन्‍तु महानगर के लिये भारत सरकार कुछ भी नहीं कर सकी है। नागरिकों के हित से सीधे तौर पर जुड़ा नगर निगम निगम तक बेचारगी की की स्‍थिति में है। मौजूदा मेयर ने जब से पद संभाला है लगातार टैक्‍स बढ़ा रहे हैं और नागरिक सुविधाओं को उपलब्‍ध करवाने के नाम पर धन की कमी बता रहे हैं। अगर वास्‍तविक सर्वेक्षण किया जाये तो आगरा गंदगी के मामले में देश में न सही प्रदेश में अव्‍वल है। सीवर, जलापूर्ति, नाले -नालियों की सफाई बीते दिनों की बात हो चुकी है। जनजीवन के लिये शर्म की बात है कि मुख्‍यमंत्री जैसे व्‍यक्‍ति को आगरा के गली मौहल्‍ले तो दूर ताजमहल की सफाई तक के लिये अपने एक साल के कार्यकाल में दो तीन बार खुद आना पड़ा है।

सिविल सोसायटी की मांग है कि आगरा का आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाये , पथकर निधि को आगरा विकास प्राधिकरण के प्रबंधन से लेकर नगर निगम , आगरा छावनी परिषद और नगर पालिका परिषद फतेहपुर सीकरी के प्रबंधन में निहित किया जाये जिससे ‘ताजमहल के नाम पर एकत्र होने वाली इस विपुल धन राशि का अधिकारियों के प्राईवेट फंड के रूप में इस्‍तेमाल होना रोका जा सके।
भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह से एक आग्रह जरूर करना चाहेंगे कि आगरा के विधायकों और मंडल के सांसदों को भले ही मंत्री बनाये या नहीं किन्‍तु अपनी सदस्‍यता वाले सदनों में नागरिकों से सीधे जुड़े मुददे उठाये जाने के अघोषित प्रतिबंध को जरूर समाप्‍त करवा दें। आगरा का जनमानस आश्‍चर्य चकित है कि उसके ‘माननीय’ समाचार पत्रों के’ पाठकों के पत्र’ कालम के लेखक या ‘ पत्र लेखक मंच’ के सदस्‍य से बनकर रह गये हैं।

Civil Society मांग करती है कि ‘आफिस-आफिस ‘ का परिणाम शून्‍य खेल को बन्‍द करवाया जाये । जनता के ई-मेल पूरी तरह से पढ़े जाये और उन पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्‍चित की जाये। ठीक इसी प्रकार कागजों पर दी जाने वाली अर्जियों पर भी कार्रवाही हो।

Civil Society ऑफ़ आगरा ने कहा- “जो कार्य हम कर रहें हैं, वो कार्य पब्लिक प्रतिनिधियों को करना चाहिए, लोगों से आगरा के विषय पर चर्चा करने पर आगरा के प्रभुद्ध जन हम से पूछते हैं कि आगरा के संसद और विधायक क्या कर रहें हैं,यह काम उनका है”।

श्री भोले ने बताया कि धनौली के किसान विकास के लिये अपने जमीन एयरपोर्ट के लिये देने को तैयार हैं। योगीजी कानपुर में एयर कनेक्टिविटी को विकास का द्वार बता रहे हैं लेकिन आगरा में विकास के लिये सही दिशा में कार्य करने को तैयार नहीं।
Civil Society की इस प्रेस वार्ता को श्री शिरोमणि सिंह, श्री राजीव सक्सेना, अनिल शर्मा, धनौली के किसान श्री भोले, अभिनय प्रसाद ने सम्बोधित किया।

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