संविधान के प्रति नागरिक की समझ व्यापक हो, ये होना चाहिए हमारा प्रयास: प्रधानमंत्री

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के केवडिया में 80वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 1921 में की गई थी। इस वर्ष पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष और सम्मेलन के अध्यक्ष ओम बिड़ला, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा आज का दिन पूज्य बापू की प्रेरणा को, सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का है। उन्होंने मुंबई हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

महत्व खो चुके कानूनों को हटाने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, समय के साथ जो कानून अपना महत्व खो चुके हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए। बीते सालों में ऐसे सैकड़ों कानून हटाए जा चुके हैं। क्या हम ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकते जिससे पुराने कानूनों में संशोधन की तरह, पुराने कानूनों को रिपील करने की प्रक्रिया स्वत: चलती रहे?
संविधान की कानूनी भाषा पर ये बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारे यहां बड़ी समस्या ये भी रही है कि संवैधानिक और कानूनी भाषा, उस व्यक्ति को समझने में मुश्किल होती है जिसके लिए वो कानून बना है। मुश्किल शब्द, लंबी-लंबी लाइनें, बड़े-बड़े पैराग्राफ, क्लॉज-सब क्लॉज, यानि जाने-अनजाने एक मुश्किल जाल बन जाता है। उन्होंने कहा, हमारे कानूनों की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी उसको समझ सके। हम भारत के लोगों ने ये संविधान खुद को दिया है इसलिए इसके तहत लिए गए हर फैसले, हर कानून से सामान्य नागरिक सीधा कनेक्ट महसूस करे, ये सुनिश्चित करना होगा।

संविधान के प्रति नागरिक की समझ व्यापक हो, ये होना चाहिए हमारा प्रयास
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, अब हमारा प्रयास ये होना चाहिए कि संविधान के प्रति सामान्य नागरिक की समझ और ज्यादा व्यापक हो। आजकल आप लोग सुनते हैं केवाईसी। ‘नो योर कस्टमर’ डिजिटल सुरक्षा का अहम पहलू है। उसी तरह केवाईसी यानि ‘नो योर कंस्ट्यूशन’ हमारे संवैधानिक सुरक्षा कवच को भी मजबूत कर सकता है।

कर्तव्यों का पालन करने पर अधिकार स्वतः सुरक्षित होंगे
प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे संविधान में कई विशेषताएं हैं लेकिन एक बहुत ही विशिष्ट विशेषता कर्तव्यों को दिया गया महत्व है। महात्मा गांधी इसे लेकर बहुत उत्सुक थे। उन्होंने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच घनिष्ठ संबंध देखा। उन्होंने महसूस किया कि एक बार जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो अधिकार स्वतः ही सुरक्षित हो जाएंगे।
नागरिक का आत्मसम्मान बढ़े, ये हमारा निरंतर प्रयास
पीएम मोदी ने कहा, हर नागरिक का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़े, ये संविधान की भी अपेक्षा है और हमारा भी ये निरंतर प्रयास है।  ये तभी संभव है जब हम सभी अपने कर्तव्यों को, अपने अधिकारों का स्रोत मानेंगे, अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

नौ हजार से ज्यादा गांवों को मिल रहा पानी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस बांध से गुजरात की 18 लाख हेक्टेयर जमीन को, राजस्थान की 2.5 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित हुई है। गुजरात के 9 हजार से ज्यादा गांव, राजस्थान और गुजरात के अनेकों छोटे-बड़े शहरों को घरेलू पानी की सप्लाई इसी सरदार सरोवर बांध की वजह से हो पा रही है। उन्होंने कहा, ये सब बरसों पहले भी हो सकता था। लेकिन बरसों तक जनता इनसे वंचित रही। जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्हें कोई पश्चाताप भी नहीं है। इतना बड़ा राष्ट्रीय नुकसान हुआ लेकिन जो इसके जिम्मेदार थे, उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। हमें देश को इस प्रवृत्ति से बाहर निकालना है।
केवड़िया डैम का लाथ चार राज्यों को हो रहा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, केवड़िया प्रवास के दौरान आप सभी ने सरदार सरोवर डैम की विशालता देखी है, भव्यता देखी है, उसकी शक्ति देखी है। लेकिन इस डैम का काम बरसों तक अटका रहा, फंसा रहा। आज इस डैम का लाभ गुजरात के साथ ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के लोगों को हो रहा है।
कोरोना काल में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती दुनिया ने देखी
पीएम मोदी ने कहा, कोरोना के इसी समय में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती भी दुनिया ने देखी है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव होना, समय पर परिणाम आना, सुचारु रूप से नई सरकार का बनना, ये इतना भी आसान नहीं है। हमें हमारे संविधान से जो ताकत मिली है, वो ऐसे हर मुश्किल कार्यों को आसान बनाती है।

विधायकों ने वेतन में कटौती कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सहयोग दिया
प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, इस दौरान संसद के दोनों सदनों में तय समय से ज्यादा काम हुआ है। सांसदों ने अपने वेतन में भी कटौती करके अपनी प्रतिबद्धता जताई है। अनेक राज्यों के विधायकों ने भी अपने वेतन का कुछ अंश देकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना सहयोग दिया है।
संविधान पर विश्वास बढ़ाने के लिए निरंतर काम हुआ
पीएम मोदी ने कहा, भारत की 130 करोड़ से ज्यादा जनता ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है, उसकी एक बड़ी वजह, सभी भारतीयों का संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है। इस विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम भी हुआ है।
इमरजेंसी के बाद नियंत्रण और संतुलन का सिस्टम मजबूत से मजबूत हुआ
प्रधानमंत्री ने कहा, इमरजेंसी के उस दौर के बाद नियंत्रण और संतुलन का सिस्टम मजबूत से मजबूत होता गया। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों ही उस कालखंड से बहुत कुछ सीखकर आगे बढ़े।

70 के दशक में शक्ति के विभाजन की मर्यादा को भंग करने का प्रयास हुआ

लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, संविधान के तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक सबकुछ संविधान में ही वर्णित है। 70 के दशक में हमने देखा था कि कैसे शक्ति का विभाजन की मर्यादा को भंग करने की कोशिश हुई थी, लेकिन इसका जवाब भी देश को संविधान से ही मिला।

भारत नई नीति-नई रीति के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा
पीएम मोदी ने कहा, इस हमले में हमारे पुलिस बल के कई जाबांज भी शहीद हुए थे। मैं उन्हें नमन करता हूं। आज का भारत नई नीति-नई रीति के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है। उन्होंने कहा, मैं आज मुंबई हमले जैसी साजिशों को नाकाम कर रहे, आतंक को एक छोटे से क्षेत्र में समेट देने वाले, भारत की रक्षा में प्रतिपल जुटे हमारे सुरक्षाबलों का भी वंदन करता हूं।

मुंबई हमले में मारे गए लोगों को अर्पित की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की तारीख, देश पर सबसे बड़े आतंकी हमले के साथ जुड़ी हुई है। 2008 में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई पर धाबा बोल दिया था। इस हमले में अनेक भारतीयों की मृत्यु हुई थी। कई और देशों के लोग मारे गए थे। मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
आज का दिन बापू और पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का
पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन पूज्य बापू की प्रेरणा को, सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का है। ऐसे अनेक प्रतिनिधियों ने भारत के नवनिर्माण का मार्ग तय किया था। देश उन प्रयासों को याद रखे, इसी उद्देश्य से 5 साल पहले 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया था।
-एजेंसियां

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