ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर की जासूसी करते पकड़ी गई चीनी पनडुब्‍बी

साउथ चाइना सी में आंख दिखा रहे चीनी ड्रैगन को करारा जवाब देने पहुंचे ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर HMS क्‍वीन एलिजाबेथ की चीन जासूसी करने में जुट गया था। इसके लिए चीनी नौसेना ने चोरी से अपनी परमाणु पनडुब्‍बी को ब्रिट‍िश युद्धपोत के पीछे लगा दिया था। हालांकि चीन की यह चोरी पकड़ी गई और ब्रिटेन के एंटी सबमरीन सोनार ने चीनी सबमरीन को डिटेक्‍ट कर लिया। ये पनडुब्बियां कई घातक क्रूज मिसाइलों से लैस थीं।
यह सोनार ब्रिटेन के फ्रिगेट्स पर लगा हुआ था जो कैरियर स्‍ट्राइक ग्रुप की रक्षा के लिए चल रहे थे। बताया जा रहा है कि जब यह कैरियर स्‍ट्राइक ग्रुप साउथ चाइना सी से प्रशांत महासागर निकल रहा था, उसी समय दो चीनी परमाणु पनडुब्‍बी ब्रिटिश युद्धपोतों के पास देखी गईं। रॉयल नेवी को चीनी पनडुब्बियों और चीन के जासूसी युद्धपोतों के आने की आशंका पहले से थी और उसने तैयारी कर रखी थी।
चीन के पास 66 पनडुब्बियां, अमेरिका-भारत से काफी आगे
एक नौसैनिक सूत्र ने डेली एक्‍सप्रेस से कहा, ‘चीन अपनी पनडुब्‍बी की संख्‍या को बहुत तेजी से बढ़ा रहा है और हमें उसे निश्चित रूप से कम नहीं आंकना होगा लेकिन उनके पास युद्ध का अनुभव नहीं है। इसके विपरीत शीत युद्ध के दौरान ब्रिटेन और अमेरिका की नौसेना ने अटलांटिक में युद्ध लड़ने के अनुभवों को काफी अभियानों के बाद हासिल किया है।’ उन्‍होंने कहा कि चीन अपनी तकनीक का इस्‍तेमाल हमारी पोजिशन का पता लगाने के लिए कर रहा है लेकिन वे पनडुब्‍बी की तैनाती इसलिए कर रहे हैं ताकि आगे चलकर सुपर पावर का दर्जा हासिल कर सकें।
उनका मकसद प्रशांत महासागर में व्‍यापार तथा सुरक्षा के मामले में आधिपत्‍य हासिल करना है। चीन इस समय दूसरी पीढ़ी के 6 पनडुब्बियों का इस्‍तेमाल कर रहा है जिसे टाइप 093 क्‍लास कहा जाता है। ये पनडुब्बियां वर्ष 2006 में सेवा में आई थीं। इस पनडुब्‍बी में चालक दल के 85 सदस्‍य होते हैं और यह 80 दिनों तक पानी के अंदर रह सकती है। इसमें सुपरसोनिक शिप किलर मिसाइलें लगी हुई हैं। चीन के पास इस समय 66 पनडुब्बियां हैं और वह अमेरिका तथा भारत से काफी आगे है।
-एजेंसियां

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