चीन की चेतावनी, एशिया-प्रशांत इलाक़े में तनाव की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि एशिया-प्रशांत इलाक़े में शीत युद्ध के दौर जैसे तनाव की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए.
न्यूज़ीलैंड में हो रहे एशिया-पेसिफ़िक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपेक) के सम्मेलन के दौरान हुई एक बैठक में वीडियो संदेश के ज़रिए शी जिनपिंग ने कहा भू-राजनीतिक स्तर पर इस इलाक़े को छोटे गुटों में बांटने की कोशिशें नाकाम हो जाएंगी.
उन्होंने कहा, “एशिया प्रशांत इलाक़े में संघर्ष की स्थिति या शीत युद्ध के दौरान मतभेद के हालात नहीं बनने चाहिए.”
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन एशिया-प्रशांत इलाक़े के आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वो चाहता है कि यहां सभी मुल्कों के लिए स्थिति फायदेमंद बनी रहे.
अपने संदेश में शी जिनपिंग ने कोरोना महामारी से बाहर निकलने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सभी मुल्कों से साथ मिलकर काम करने की अपील की.
उन्होंने कोविड वैक्सीन तक विकसित देशों की पहुंच आसान करने के बारे में बात की और कहा कि मुल्कों के बीच टीकाकरण की खाई को जल्द से जल्द ख़त्म किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमें इस बात पर सहमत होना चाहिए कि वैक्सीन वैश्विक हित के लिए है और हमें सुनिश्चित करना चहिए कि ये समान रूप से सभी मुल्कों तक पहुंचे.”
इधर गुरुवार को चीन और अमेरिका के अचानक जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने का फ़ैसला किया है.
शी जिनपिंग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन साझा चुनौती है जिसका सामना करने के लिए सभी देशों को साथ आने की ज़रूरत है.
अगले सप्ताह होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीनी राष्ट्रपति शी जिंनपिंग के वर्चुअल बैठक से पहले हुए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है.
एशिया-प्रशांत इलाक़े में ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बीते दिनों तनाव बढ़ा है. ताइवान की सीमा के पास चीन ने सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं.
इसी साल अक्तूबर ताइवान की वायुसीमा में चीनी लड़ाकू उड़ानें देखी गई थीं. इस मामले में बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा था कि अमेरिका ये सुनिश्चित करेगा कि ताइवान अपनी रक्षा कर सके.
ताइवान खुद को स्वशासित गणतंत्र मानता है जबकि चीन उसे अपना हिस्सा बताता है.
चीन दक्षिण चीन सागर के एक बड़े हिस्से को भी अपना बताता रहा है, यहां पर उनके कई कृत्रिम द्वीप भी बनाए हैं. ये हिस्सा बेहद अहम समुद्री मार्गों में से एक है हर साल इस इलाक़े से अरबों डॉलर का व्यापार होता है. इस इलाक़े के कुछ हिस्सों में ब्रूनेई, मलेशिया, फ़िलीपीन्स, ताइवान और वियतमान अपना बताते हैं.
इस इलाक़े में चीन के बढ़ते प्रभुत्व से निपटने के लिए हाल में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया ने एक ऑकस नाम का एक नया गठबंधन बनाया था जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी तकनीक वाली परमाणु पनडुब्बियां खरीदेगा.
इस समझौते से चीन तो नाराज़ हुआ ही थी फ्रांस ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों ने इसे ‘पीठ में छुरा घोंपने जैसा’ कहा था.
ऑस्ट्रेलिया फ्रांस से पनडुब्बियां खरीदने वाला था, लेकिन इस समझौते के बाद उसने फ्रांस के साथ अपना करार रद्द कर दिया.
-एजेंसियां

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