चीन के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने पहला भारत आधारित इन्वेस्टमेंट फंड लॉन्च किया

चीन के सबसे बड़े सरकारी बैंक द इंडस्ट्रियल एण्‍ड काेमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी) ने दो महीने पहले चीन का पहला भारत आधारित इन्वेस्टमेंट फंड लॉन्च किया। आईसीबीसी ने कहा कि भारत के शेयर बाजार ने दोहरे अंकों में वृद्धि की संभावनाओं के साथ चीनी निवेशकों को सर्वोत्तम अवसर प्रदान किया है।
उधर, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी कहा, ‘विदेश का सबसे महत्वपूर्ण तेजी से उभरते बाजार के रूप में भारत के शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म ट्रेंड पॉजिटिव रहने वाला है। चीनी निवेशकों के लिए भारतीय शेयरों में निवेश का अभी सर्वोत्तम अवसर है।’
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत के परिपक्व शेयर बाजार से प्रभावित चीन न केवल यहां निवेश कर रहा है, बल्कि इससे सीखने को भी उत्सुक है। चीन में भारतीय शेयर बाजार के पैमानों का अनुकरण करने की पहल हो रही है। पिछले दशक में भारतीय शेयर बाजार ने चीन के शेयर बाजार को पछाड़ दिया। अक्टूबर 2008 से भारतीय शेयरों में 394 प्रतिशत की मजबूती आ चुकी है जबकि चीनी शेयर बाजार के सूचकांक महज 70 प्रतिशत चढ़ा।
चाइनीज अकैडमी ऑफ सोशल साइंस में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्ट्रैटिजी की एसोसिएट रिसर्च फेलो लेओउ शिआस्वे ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, ‘चीन के शेयर बाजार के मुकाबले भारत ज्यादा मच्योर है। उसके पास बहुत ज्यादा विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) हैं जो जोखिम के प्रति काफी धैर्यवान होते हैं जबकि चीनी बाजार में ज्यादातर छोटी घटनाओं से चिंतित होनेवाले प्राइवेट इन्वेस्टर्स हैं। इस वजह से चीन का शेयर बाजार बहुत उथल-पुथल वाला और वित्तीय जोखिमों के प्रति संवेदनशील है।’
लेओउ ने कहा कि चीन के बाजार से भारत के शेयर बाजार के लंबे इतिहास की तुलना में अंतर साफ झलकता है। 1875 में स्थापित हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज है जबकि चीन में पहला स्टॉक एक्सचेंज 1990 में स्थापित हुआ।
चीन के रेग्युलेटर्स को भारत से सीखने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत को दशकों से व्यापार घाटा हो रहा है। इस वजह से उसने एफआईआईज समेत तमाम विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काफी होमवर्क किया जिसमें निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी शामिल है।’
भारतीय और चीनी बाजारों में अंतर की विस्तृत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि इंडियन स्टॉक मार्केट ने पूंजी के मुक्त प्रवाह की अनुमति दी। उसके पास निवेशकों को जोखिमों के खिलाफ हेजिंग का भी काफी दुरुस्त तंत्र है लेकिन सरकारी कंपनियों की मौजूदगी की वजह से चीन का शेयर बाजार को इस तरह का तंत्र विकसित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है।
लेओउ ने कहा कि अमेरिका के साथ जारी व्यापारिक युद्ध की सूरत में चीन भारत के बाजार से लाभ उठा सकता है। उन्होंने कहा, ‘व्यापारिक तनाव बढ़ने के मद्देनजर एशिया के उभरते बाजारों में निवेश करने की सोच रहा कोई भी निवेशक चीन की जगह भारत का रुख करेगा।’
-एजेंसियां

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