मोदी राज में एक तिहाई रह गया है चीन का निवेश

नई दिल्‍ली। लद्दाख में गलवान घाटी की घटना के बाद चीन के खिलाफ भारत लगातार सख्त फैसले ले रहा है। चीनी कंपनियों, चीनी मोबाइल ऐप्स और चीन से आने वाले निवेश पर सरकार की विशेष नजर है।
#BoycottChina की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में चीन से भारत में केवल 163 मिलियन डॉलर का FDI आया है। मोदी शासनकाल में चीन से आने वाला निवेश एक तिहाई रह गया है।
मोदी शासनकाल में एक तिहाई हुआ FDI
छह साल पहले 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे। 2013-14 में चीन से कुल 124 मिलियन डॉलर का FDI आया था। मोदी के सत्ता में आते ही यह अगले वित्त वर्ष यानी 2014-15 में 494 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया और उसके अगले वित्त वर्ष 2015-16 में यह घटकर 461 मिलियन डॉलर पर आया। उसके बाद लगातार गिरावट आती रही और 2019-20 में यह 163 मिलियन डॉलर रहा।
अप्रैल में FDI के नियम बदले गए थे
अप्रैल महीने में चीन से आने वाले निवेश को रोकने के लिए सरकार ने FDI के नियम में बदलाव किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक उसके बाद से चीन से निवेश को लेकर सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है। नए नियम के मुताबिक चीन से आने वाले निवेश को पहले सरकार से मंजूरी की जरूरत है।
चीन से केवल 0.51 फीसदी FDI
सरकार की तरफ से जो डेटा जारी किया गया है उसके मुताबिक पिछले 20 सालों में चीन से आने वाले एफडीआई की कुल हिस्सेदारी महज 0.51 फीसदी है। इस मामले में वह 18वें पायदान पर है। पिछले 20 सालों में अगर भारत में सबसे ज्यादा FDI आया है तो वह मॉरिशस से है। कुल FDI में उसकी हिस्सेदारी 30.36 फीसदी है। दूसरे नंबर पर सिंगापुर (20.78 फीसदी), नीदरलैंड (7.20 फीसदी), जापान (7.13 फीसदी), अमेरिका (6.34 फीसदी) का नंबर है। इस लिस्ट में चीन 18वें नंबर पर है। उसकी हिस्सेदारी मात्र 0.51 फीसदी है।
-एजेंसियां

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