छोटे-छोटे देशों को कर्ज बांटने वाले चीन की अपनी आर्थिक स्‍थिति खराब

पेइचिंग। चीन भले ही दुनियाभर के देशों तक अपना कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहा हो, कई छोटे देशों को धड़ाधड़ कर्जे बांट रहा हो, पर उसकी अपनी सच्चाई काफी हैरान करने वाली है।
हुनान प्रांत के चांगदी जैसे कई शहरों की हालत यह है कि वहां पैसे की तंगी के चलते कई सरकारी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार काफी सुस्त हो गई है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसा लगता है जैसे चीन के कई शहर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
60 लाख की आबादी वाले शहर चांगदी में रहने वाले दो बच्चों के पिता मा (44) ने बताया, ‘यह मेरी कल्पना से परे है। कई सड़कों के बनने से पूरा क्षेत्र काफी तेजी से विकसित हुआ है लेकिन हाल में कई सरकारी परियोजनाओं पर काम धीमा हो गया।’ चांगदी अकेला ऐसा शहर नहीं है जहां कामकाज धीमा हुआ है।
दरअसल, तेज विकास के लिए इन शहरों के स्थानीय प्रशासन को स्टेट बैंकिंग सिस्टम से आसानी से कर्ज मिल गया और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ताबड़तोड़ खर्चे किए गए।
सड़कें, पुल, एयरपोर्ट, रेलवे स्‍टेशन, रिहायशी टॉवर, कॉन्फ्रेंस सेंटर और स्पोर्ट्स फेसिलिटीज पर सरकार की ओर से किए गए भारी-भरकम खर्चों से ही पिछले दशक में चीन की ग्रोथ तेजी से बढ़ी। हालांकि यह सब करने में पेइचिंग पर काफी कर्ज हो गया। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स ने मध्य-2017 में कुल कर्ज को चीन के GDP का 256 फीसदी बताया था- इसमें से ज्यादातर सरकारी उद्यमों और स्थानीय सरकारों के कारण है।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग चाहते हैं कि वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए अर्थव्यवस्था में कुल ऋण के स्तर को न्यूनतम रखा जाए, जो आसान काम नहीं है। चांगदी जैसे शहरों के विकास के लिए सरकार को फंडिंग तो करनी ही होगी। चांगदी को ‘चीन का स्टैलिनग्राद’ कहा जाता है क्योंकि 1943 की जंग में इसने जापानियों को कड़ी चुनौती दी थी। यह शहर क्षेत्र में आर्थिक केंद्र के तौर पर उभरना चाहता है, जो प्रांतीय राजधानी चांगशा से ट्रेन के रास्ते मात्र 2 घंटे की दूरी पर है।
यह चीन के उन सैकड़ों शहरों में से एक है, जो देश के आर्थिक परिदृश्य में बड़ी भूमिका में आने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कई शहरों की तरह इनके विकास का मॉडल और ढांचागत सुविधाओं पर खर्च सरकार की उम्मीदों और बजट से कहीं ज्यादा हो गया है। पिछले साल चांगदी की आय 16 अरब युआन रही जो उसके कुल खर्चे का केवल एक चौथाई है, बाकी की पूर्ति पेइचिंग और चांगशा से हुई।
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पेइचिंग ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप्स पर नियंत्रण कस दिया है जो इंफ्रास्ट्रक्चर में फंडिंग करते हैं। उधर, बैंक ऐसे प्रॉजेक्ट्स के लिए कर्ज देने से बच रहे हैं, जहां फौरन लाभ न दिखता हो। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक कम से कम शहर के 7 बड़े प्रॉजेक्ट्स ऐसे हैं जो शुरू नहीं हो सके हैं। पुनर्निर्माण के दर्जनों प्रॉजेक्ट्स भी हैं जिसके बारे में सिटी की प्लानिंग एजेंसी काम कर रही है।
चांगदी डिवेलपमेंट ऐंड रिफॉर्म कमीशन का कहना है कि सरकारी ऋण को पहले खत्म करने और सरकारी खर्चे को रोकने वाली नीतियों के कारण यह देरी हो रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कई प्रांतीय सरकारों को साफ निर्देश दिया है कि वे पुराने चल रहे प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने पर फोकस करें, फिलहाल कोई नया निवेश करने के बारे में न सोचें।
-एजेंसी

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