चीन नहीं करेगा मेरे बाद दलाई लामा के पद का फैसला, अनुयायी तय करेंगे: दलाई लामा

China will not follow the decision of the post of Dalai Lama, Followers will decide: Dalai Lama
चीन नहीं करेगा मेरे बाद दलाई लामा के पद का फैसला, अनुयायी तय करेंगे: दलाई लामा

तवांग। तिब्बती बौद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने शनिवार को स्पष्ट किया कि उनके बाद दलाई लामा का पद जारी रहेगा या नहीं, इसका फैसला उनके अनुयायी करेंगे न कि कोई और।
आध्यात्मिक गुरु का यह बयान चीन को जवाब है जो कहता रहा है कि उसके पास दलाई लामा की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार है।
दलाई लामा ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हजारों अनुयायियों को संबोधित किया। तवांग तिब्बती बौद्ध समुदाय का दूसरा सबसे बड़ा मठ माना जाता है। दलाई लामा ने इस बात से इंकार किया कि उनके पास यह जानकारी है कि उनका उत्तराधिकारी कहां पैदा होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या अगला दलाई लामा कोई महिला हो सकती है तो उन्होंने कहा, ‘यह भी हो सकता है।’
तिब्बती बौद्ध परंपरा में आध्यात्मिक गुरु की मौत के बाद वरिष्ठ भिक्षुक उस युवा लड़के की पहचान करते हैं जिसमें दिवंगत गुरु के अवतार के लक्षण दिखते हैं। दलाई लामा चीन की आपत्तियों के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर हैं।
दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश को विवादित हिस्सा मानता है और उस पर अपना दावा जताता रहा है।
दलाई लामा के दौरे को देखते हुए तवांग को सजाया गया है। जगह-जगह रंगीन प्रेयर फ्लैग्स और फूलों से सजावट की गई है, सड़कों की मरम्मत और नालों की सफाई हुई है। तवांग मठ के आस-पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यिड-गा-चोएजिन ग्राउंड की सुरक्षा बढ़ा दी गई है जहां दलाई लामा प्रवचन देंगे।
336 साल पुराना तवांग मठ भारत का सबसे बड़ा और तिब्बत के ल्हासा स्थित पोटला पैलेस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तिब्बती बौद्ध मठ है। 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग मठ को तिब्बती में ‘तवांग गाडन नामग्याल ल्हास्ते’ नाम से जाना जाता है जिसका मतलब है घोड़ों द्वारा चुना गया दिव्य स्वर्ग।
तवांग मठ का संबंध महायान बौद्ध शाखा से है और इसका धार्मिक जुड़ाव ल्हासा के ड्रेपंग मठ से है जो ब्रिटिश शासन के दौर में भी मौजूद था। 1950 में तिब्बत पर कब्जे के बाद चीन दावा करता रहा है कि तवांग उसका हिस्सा है। चीन की सरकारी मीडिया ने बुधवार को भारत पर आरोप लगाया कि वह दलाई लामा का इस्तेमाल कर रहा है। चीन ने तिब्बती धर्म गुरू के तवांग दौरे का विरोध करते हुए भारत को चेतावनी दी है कि इससे दोनों देशों के रिश्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
दलाई लामा 1959 में अपने अनुयायियों के साथ ल्हासा से तवांग होते हुए पैदल ही भारत आ गए थे। 2009 के बाद दलाई लामा का यह सातवां अरुणाचल दौरा है।
-एजेंसी

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