चीन बोला: मानसरोवर यात्रा के लिए नाथुला दर्रा खोलने पर बातचीत को तैयार

बीजिंग। चीन ने कहा है कि वह सिक्किम में नाथुला दर्रे को भारतीय श्रद्धालुओं के लिए फिर खोलने पर बातचीत करने को तैयार है। हालांकि भारत से ब्रह्मपुत्र नदी का हाइड्रोलॉजिकल डाटा शेयर करने से बीजिंग ने इंकार कर दिया है।
बता दें कि नाथुला दर्रे से होकर ही भारतीय श्रद्धालु तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं। डोकलाम गतिरोध के चलते जून में ये यात्रा रोक दी गई थी।
न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्‍पोक्सपर्सन गेंग शुआंग ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “चीन नाथुला दर्रे को फिर से खोलने के मसले पर भारत से बातचीत करने को तैयार है। लंबे समय तक चीन ने भारतीय श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं दी हैं। भारत-चीन सीमा के वेस्टर्न सेक्शन ने दोनों देशों के बीच हुए समझौते को मान्यता दी है। इसके तहत ही चीन ने भारतीय श्रद्धालुओं के लिए नाथुला दर्रा खोला था।”
“लेकिन भारतीय सैनिकों के गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर क्रॉस करने के चलते सीमा पर विवाद पैदा हो गया इसलिए नाथुला दर्रा बंद कर दिया गया था।”
1981 में शुरू हुई थी यात्रा
मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम होकर जाने वाले रास्ते को 2015 में खोला गया था, इसके जरिये श्रद्धालु बसों से नाथुला से कैलाश तक 1500 km की दूरी तय करते हैं। ये यात्रा इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री की तरफ से 1981 में शुरू की गई थी, तब ये हिमालय के लिपु दर्रे से होकर तय की जाती थी, जो उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र को तिब्बत के पुराने व्यापारिक शहर ताकलाकोट को जोड़ता था।
डाटा कलेक्शन स्टेशन को अपग्रेड किया जा रहा है
गेंग शुआंग ने कहा, “हमने लंबे समय से भारत के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के डाटा को लेकर सहयोग किया है लेकिन चीनी क्षेत्र (तिब्बत) में डाटा कलेक्शन स्टेशन को अपग्रेड किया जा रहा है, इसके चलते हम इस स्थिति में नहीं हैं कि डाटा कलेक्ट कर सकें और भारत से उसे शेयर किया जा सके।”
भारत इस बारे में जानता है
जब गेंग से पूछा गया कि क्या भारत को हाइड्रोलॉजिकल डाटा साझा नहीं करने की जानकारी दी गई है, इस पर गेंग ने कहा, “जहां तक मेरी जानकारी है, भारतीय पक्ष इस बारे में जानता है।” जब गेंग से पूछा गया कि चीन डाटा कब मुहैया कराएगा तो उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में सोचा जा सकता है।
इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री ने क्या कहा था?
18 अगस्त को इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने कहा था, “2006 में दोनों देशों के बीच इस मसले पर एक्सपर्ट लेवल का एक मैकेनिज्म बनाया गया था, जो आज भी प्रासंगिक है। दो एमओयू हुए थे जिसके तहत चीन को बाढ़ के मौसम (15 मई से 15 जून के बीच) में सतलज और ब्रह्मपुत्र नदी का डाटा भारत के साथ शेयर करना है, पर इस साल अब तक हमें चीन की तरफ से हाइड्रोलॉजिकल डाटा नहीं मिला है।”
बता दें कि चीन हर साल ये डाटा भारत के साथ शेयर करता है ताकि पानी के बहाव का अनुमान लगाकर भारत के नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
-एजेंसी