लद्दाख में चीन को पीछे खींचने पड़े अपने कदम, अब नजरें लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत पर टिकीं

नई दिल्‍ली। लद्दाख में भारतीय सरजमीं पर कब्‍जा करने की बदनीयत रखने वाले चीन को अपने कदम पीछे हटाने पड़े हैं। वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर हजारों सैनिकों की तैनाती के बावजूद अपने मंसूबों में कामयाबी नहीं मिलने से चीनी ड्रैगन करीब दो किलोमीटर पीछे हट गया है।
यही नहीं, अब तक आक्रामक रुख अख्तियार करने वाली चीनी सेना अब शांत है।
आखिर ऐसा क्‍या हुआ
दरअसल, भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की पुख्ता तैयारी कर ली है और बोफोर्स तोप का मुंह भी चीन की ओर मोड़ दिया है। भारतीय सेना साफ कर चुकी है कि जब तक स्थिति पहले जैसी नहीं हो जाती, वह एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। हालांकि विवाद सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन भारत अब किसी भी कीमत पर दबाव स्‍वीकार करने को राजी नहीं है।
यही कारण है कि चीन ने सीमा पर अपने सैनिकों के साथ-साथ हथियारों, टैंकों और आर्टिलरी गनों की भी तैनाती बढ़ाई तो इसके जबाव में भारत ने भी पूरा इंतजाम कर लिया।
भारतीय सेना अब शॉर्ट नोटिस पर टी-72, टी-90 टैंकों और बोफोर्स जैसी आर्टिलरी गनों का लद्दाख सीमा पर इस्‍तेमाल कर सकता है। स्वीडन से हासिल बोफोर्स गनों ने करगिल युद्ध के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की थी और पाकिस्तानी घुसपैठियों के छक्‍के छुड़ा दिए थे। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह -3 से लेकर 70 डिग्री के ऊंचे कोण तक फायर कर सकती है। साथ ही वायुसेना के विमान भी लगातार चीन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
तीन प्रमुख वजहें
चीन के अपने कदम वापस खींचने के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं। पहली वजह है भारतीय सेना की जोरदार जवाबी तैयारी। लद्दाख में पिछले महीने की 5 तारीख को और फिर सिक्किम में चार दिन बाद 9 तारीख को चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। सिक्किम का विवाद तो नहीं बढ़ा, लेकिन लद्दाख में गलवान और प्‍योंगयांग शो लेक के पास एलएसी पर चीन ने आक्रमकता दिखाई और दबाव की रणनीति के तहत अपने सैनिक बढ़ाने शुरू कर दिए। बताया जा रहा है कि चीन ने एलएसी पर 5 हजार सैनिक भेजे।
उन्‍होंने कहा कि चीन की नापाक हरकत के जवाब में भारत ने भी एलएसी पर अपने सैनिक बढ़ा दिए और चीन की बराबरी में हथियार, टैंक और युद्धक वाहनों को भी इलाके में तैनात कर दिया। इस तैयारी के बाद भी भारत ने संयम के साथ बातचीत का रास्ता भी नहीं छोड़ा है। गतिरोध को खत्‍म करने के लिए 6 जून को दोनों देशों के लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों की बातचीत होने जा रही है। बता दें कि इस विवाद की शुरुआत के बाद अब तक तक 10 दौर की बातचीत हो चुकी है।
इसके अलावा चीन के पीछे हटने की दूसरी वजह उसका आंतरिक संकट है। कोरोना वायरस संकट की वजह से चीन की अर्थव्‍यवस्‍था भीषण मंदी के दौर से गुजर रही है। दुनिया की फैक्‍ट्री कहे जाने वाले चीन से निर्यात कम हो गया है, इससे वहां नागरिकों में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ रहा है। इसे दबाने के लिए चीनी नेतृत्‍व राष्‍ट्रवाद का कार्ड खेल रहा है। अमेरिका की वजह से वह ताइवान और साउथ चाइना सी में कुछ कर नहीं पा रहा है तो उसने भारत के खिलाफ दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। चीनी राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग के सपने को पूरा करने के लिए चीन ने अरबों डॉलर खर्च करके बेल्‍ट एंड रोड परियोजना शुरू की लेकिन उससे उसे कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। इससे चीन पर आंतरिक स्‍तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
दुनिया की ओर से चीन पर बढ़ता चौतरफा दबाव
चीन के रुख में नरमी की तीसरी वजह दुनिया की ओर से बढ़ता चौतरफा दबाव है। साउथ चाइना सी, कोरोना और व्‍यापार के मुद्दे पर अमेरिका के साथ उसकी जंग चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के ताकतवर देशों के ग्रुप-7 का विस्तार कर भारत को शामिल करने के संकेत दिए हैं। जापान, व‍ियतनाम, ऑस्‍ट्रेलिया और ताइवान चीन की व‍िस्‍तारवादी नीति का लगातार विरोध कर रहे हैं। चौतरफा घिरा चीन इस समय दुनिया की सबसे बड़ी सेना रखने वाले भारत से जंग का खतरा मोल नहीं ले सकता है। चीन भारतीय बाजार को भी नहीं खोना चाहता है, इसी वजह से उसे लद्दाख में अपने रुख में नरमी लानी पड़ी है।
भारत और चीन के बीच यह विवाद लगभग एक महीने पहले शुरू हुआ था। चीनी सेना ने भारतीय सीमा में घुसकर पैंगोंग सो और गलवान घाटी में कैंप बनाने शुरू कर दिए थे। भारतीय सेना ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चीनी सैनिकों से तुरंत पीछे हटने को कहा ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे लेकिन चीन ने ऐसा करने के बजाय अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भेज दिए।
-एजेंसियां

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