चीन का दावा: दक्षिण चीन सागर में हमारा ‘निर्विवाद आधिपत्य’

पेइचिंग। चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर में ऐंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम की तैनाती का गुरुवार को बचाव किया। उसने कहा कि इस इलाके पर उसका ‘निर्विवाद आधिपत्य’ है।
बता दें कि चीन का साउथ चाइना सी और ईस्ट चाइना सी दोनों में ही कब्जे को लेकर तमाम देशों से विवाद है। चीन करीब पूरे साउथ चाइना सी पर अपना दावा जताता है जबकि वियतनाम, फिलीपींस, मलयेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसके उलट दावा करते हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से जब गुरुवार को पत्रकारों ने मिसाइलों की तैनाती के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा, ‘चीन का नान्शा (स्पार्टली के नाम से जाना जाता है) द्वीप और उससे जुड़े द्वीप समूहों पर निर्विवाद संप्रभुता है।’ बता दें कि वियतनाम और ताइवान स्पार्टली द्वीप समूह पर अपना दावा करते हैं।
चुनयिंग ने कहा, ‘साउथ चाइना सी में चीन की गतिविधियां हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखने के लिए है। यह हमारा अधिकार है।’ एक तरह से मिसाइलों की तैनाती की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, ‘तैनाती किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। संबंधित पक्षों को इसे लेकर चिंतिति नहीं होना चाहिए।’
इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि चीन ने साउथ चाइना सी में 3 जगहों पर ऐंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम को तैनात किया है।
रिपोर्ट्स में कहा गया कि पिछले 30 दिनों के भीतर इन मिसाइलों को फेयरी क्रॉस रीफ, सूबी रीफ और मिसचिफ रीफ पहुंचाया गया है।
अप्रैल में चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर में अपना अबतक का सबसे बड़ा अभ्यास किया था। इस दौरान उसने पही बार एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और अपने सबसे ज्यादा आधुनिक हथियारों को प्रदर्शन किया था। चीन का समुद्र में यह सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास ऐसे वक्त में किया गया जब अमेरिका फ्रीडम ऑफ नैविगेशन (नौवहन की स्वतंत्रता) के तहत चीन द्वारा बनाए गए कृत्रिम द्वीपों के पास से अपने युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट्स को भेजा था। बता दें कि दक्षिण चीन सागर रणनीतिक तौर पर काफी अहम है। यह न सिर्फ ऊर्जा के लिहाज से समृद्ध है बल्कि यह एक व्यस्त व्यापार मार्ग है।
-एजेंसी

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