चीन की घोषणा, अमेरिकी उत्पादों की 16 श्रेणियों पर लगे शुल्क हटेंगे

पेइचिंग। लंबे समय से चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के प्रभाव से भारत सहित अन्य देश भी अछूते नहीं हैं। इस व्यापारिक तनाव के बीच दोनों देशों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिका और चीन की बड़ी कंपनियां इस बार पर जोर दे रही हैं कि बदले की भावना से लगाए जा रहे आयात शुल्क में ढील दी जाए। चीन ने अमेरिका के उत्पादों की 16 श्रेणियों के ऊपर लगे शुल्क को हटाने की बुधवार को घोषणा दी है। चीन ने यह घोषणा ऐसे समय की है जब अमेरिका के साथ अगले महीने नये दौर की व्यापार वार्ता होने वाली है। सीमा शुल्क आयोग के अनुसार, यह छूट 17 सितंबर से प्रभावी होगी। आयोग ने शुल्क के दायरे से निकलने वाले उत्पादों की दो सूची जारी की। इनमें समुद्री खाद्य उत्पाद तथा कैंसर के रोकथाम की दवाएं शामिल हैं।
ट्रेड वॉर से बढ़ रही महंगाई
अमेरिकी सरकार ने पहली बार क्रू़ड पर भी अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। सितंबर की शुरुआत में ही चीन के कई सामानों पर 15 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क प्रभावी हो गया है। हालांकि इससे अमेरिका में कपड़े, जूते, खेल का सामान और कई इलेक्ट्रिक आइटम महंगे हो गए। इस कदम से ट्रंप सरकार की अर्थव्यवस्था को भी झटका लगने का खतरा है।
चीन ने भी लगाया जवाबी शुल्क़
अमेरिका के इस कदम के बाद चीन ने भी जवाब में अमेरिकी आयात पर अतिरिक्त शुल्क मढ़ दिया। ट्रंप ने कहा था कि चीन से इस बारे में बातचीत होती रहेगी लेकिन शुल्क में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
चीन की जीडीपी में बड़ी गिरावट
ट्रेड वॉर का असर चीन की जीडीपी और मुद्रा पर भी पड़ रहा है। पिछली तिमाही में चीन की विकास दर पिछले 27 वर्षों में सबसे कम रही। इसके अलावा बेरोजगारी में भी वृद्धि हुई है। 2018 में चीन में 4.9 प्रतिशत बेरोजगारी थी जो कि अब 5.3 प्रतिशत हो गई है। चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है और महंगाई भी बढ़ी है।
अमेरिकी कंपनियां भी चिंतित
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी की 75 प्रतिशत कंपनियां नहीं चाहती कि चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए क्योंकि इससे उनके रेवेन्यू पर फर्क पड़ रहा है। हालांकि प्रेजिडेंट ट्रंप का कहना है कि चीन के सामान पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगने से चीन की ही अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। सर्वे में अमेरिका की आधी से अधिक कंपनियों ने कहा कि उन्हें नुकसान हो रहा है। कंपनियों का कहना है कि चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने से उनकी परचेजिंग पावर गिर रही है और इसलिए वहां के स्थानीय बाजार में किया गया निवेश डूब रहा है।
-एजेंसियां

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