चिदंबर के आरोप पूरी तरह जानकारी की कमी और बेईमानी की नीयत दर्शाते हैं: नीति आयोग

नई दिल्‍ली। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर के संशोधित आंकड़ों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मचे घमासान के बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने आंकड़ों से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने नेताओं को आंकड़ों पर राजनीति नहीं करने की भी नसीहत दी।
राजीव कुमार ने स्पष्ट कहा कि जीडीपी के आंकड़े देश के 10 प्रमुख सांख्यिकीविदों के जांचने-परखने के बाद जारी किए गए हैं। कुमार ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान जीडीपी विकास दर को नीचे की तरफ संशोधित करने के कारणों के बारे में विस्तार से बताया।
चिदंबरम के आरोपों पर क्या कहा?
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबर द्वारा नीति आयोग पर जीडीपी के नए आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों पर राजीव कुमार कहा कि यह आरोप पूरी तरह से जानकारी की कमी और बेईमानी की नीयत को दर्शाता है।
यह आकलन नीति आयोग तैयार नहीं करता। इन्हें बीते 30 महीनों में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के विशेषज्ञों, पेशेवरों और योग्य लोगों द्वारा तैयार किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनके आंकड़ों पर पहले कभी सवाल नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा भी है कि आरोप उनके पूर्वाग्रहपूर्ण स्वभाव को दिखाता है क्योंकि जब चीजें आपके पक्ष में होती हैं तो आप स्वीकार कर लेते हैं और जब आपके पक्ष में नहीं होती, तो उसकी आलोचना करते हैं।
क्या डेटा डिबेट से राजनीतिज्ञों को अलग रहना चाहिए?
उन्हें डेटा का इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। उन्हें इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। उन्हें आंकड़ों की सत्यता को स्वीकार करना चाहिए और इस पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
डाटा जारी करने में नीति आयोग क्यों शामिल हुआ?
हमने दिग्गज सांख्यिकीविदों के साथ दो बार बैठकें कीं और समस्त आंकड़ों की दो बार जांच की। जब उन्होंने आंकड़ों की अच्छी तरह जांच-परख कर ली और प्रणाली को मंजूरी दे दी, तब उन्हें जारी किया गया। पूरी प्रक्रिया में नीति आयोग शामिल था इसलिए इसे जारी करने के लिए इसे एक बेहतर प्लेटफॉर्म समझा गया। बैक सीरिज की रिलीज आईआईपी और डब्ल्यूपीआई सीरिज जारी करने जैसा कोई तकनीकी काम नहीं है। यह उससे काफी व्यापक प्रणालीगत मुद्दा है और पूरी वृहद अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है इसलिए इसे जारी करने के लिए नीति आयोग स्वाभाविक प्लेटफॉर्म बना और सीएसओ ने ऐसा करने के लिए हमसे आग्रह किया था।
किन कारणों से आंकड़े नीचे की तरफ संशोधित किए गए?
इसका सबसे बड़ा कारण पिछली सीरिज में सेवा क्षेत्र का ओवर इस्टिमेशन था। भारी मात्रा में आउटडेटेड बेस डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा था। कुछ आंकड़ों के लिए 1993 को आधार बनाया गया था और नए सर्वे करने के बजाय उसी के आधार पर विकास के आंकड़ों का अनुमान लगाया जा रहा था।
दूसरा कारण वित्तीय सेवाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र के नेशनल अकाउंट्स 2008 के मुताबिक आरबीआई को एक गैर बाजार इकाई माना जाना चाहिए, इसलिए उसके आंकड़ों को गणना में शामिल नहीं करना चाहिए।
तीसरा कारण, अनौपचारिक क्षेत्र के आंकड़ों का अनुमान मनमाने तरीके से लगाया गया। उनके पास जनरल ट्रेड इंडेक्स के ग्रोथ के आंकड़े ही नहीं थे। अब सीएसओ के पास बिक्री कर का आंकड़ा होता है, जिसका इस्तेमाल टोटल ट्रेड टर्नओवर के लिए किया जाता है। असंगठित व्यापार, वित्तीय सेवाएं और दूरसंचार में अतीत में व्यापक स्तर पर ओवर एस्टीमेशन सामने आया, जिसे सुधारा गया। इसके कारण सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी और ग्रोथ में योगदान कम हो गया।
इन आंकड़ों से लगता है भारत दहाई अंक में ग्रोथ रेट से अभी काफी दूर है?
इसके तीन मुख्य कारण हैं। पहला, विकास दर को आठ फीसदी से ऊपर ले जाना और उसे दहाई अंक तक पहुंचाना काफी कठिन है। इसके लिए आपको उत्पादकता और लॉजिस्टिक्स में सुधार के कदमों पर ध्यान देने की जरूरत है। नहीं तो, आप इसे हासिल नहीं कर पाएंगे। दूसरा, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग नहीं हैं। तीसरा, स्टैटिस्टिक्स सिस्टम में अधिक से अधिक संसाधनों का निवेश करिए और इसे आधुनिक और वृहद बनाइए।
-एजेंसियां

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