चिदंबरम को जेल में घर का खाना खाने की इजाजत नहीं: हाईकोर्ट

नई दिल्‍ली। आईएनएक्स मीडिया मामले में घिरे पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके घर का बना खाना खाने की इजाजत नहीं दी।
उन्होंने कहा कि जेल में हर किसी के लिए एक समान खाना उपलब्ध कराया जाएगा। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने चिदंबरम की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि जेल में उनके मुवक्किल को घर का बना खाना देने की इजाजत दी जानी चाहिए।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा, “मी लॉर्ड, वह 74 साल के हैं।”
इसका सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया, “हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला भी वृद्ध हैं और वह भी जेल में है। एक संस्था होने के नाते हम किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकते।”
चिदंबरम गलत कृत्य में शामिल रहे हैं: तुषार मेहता
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ अपराध की सजा में सिर्फ सात साल की कैद होना है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के आरोप भी नहीं लगाए जा सकते क्योंकि उनकी इसमें कोई भूमिका नहीं है।
इस पर तुषार मेहता ने कहा, “हम प्री-चार्जशीट के चरण में पहुंच चुके हैं। याचिकाकर्ता 21 अगस्त को गिरफ्तार हुआ है और यह अपराध 2007 में घटित हुआ है। चिदंबरम गलत कृत्य में शामिल रहे हैं।”
चिदंबरम के आत्मसमर्पण आवेदन पर कल आएगा आदेश
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों के निष्कर्ष के बाद पी चिदंबरम के आत्मसमर्पण आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया है और आदेश कल जारी किया जाएगा। पी चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए रिश्वत लेकर आईएनएक्स मीडिया को 2007 में 305 करोड़ रु. लेने के लिए विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड से मंजूरी दिलाई थी। ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे पूछताछ कर रही है।
-एजेंसियां

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