मथुरा में हजारों Hyundai कार उपभाेक्‍ताओं के साथ धोखा, न डीलर का पता है और न डीलरशिप का

मथुरा। भारत के कार बाजार में दूसरे नंबर पर स्‍थापित दक्षिण कोरिया की मशहूर वाहन निर्माता कंपनी Hyundai के हजारों उपभोक्‍ताओं को बड़े सुनियोजित तरीके से धोखा दिया जा रहा है लेकिन न कोई देखने वाला है और न सुनने वाला।
यह धोखा मथुरा के नेशनल हाईवे पर नवादा में स्‍थित Shiel Hyundai के नाम से संचालित उस एकमात्र शोरूम पर मिल रहा है जिसके केयरटेकर इन दिनों आगरा निवासी ट्रांसपोर्टर एवं सुपारी व्‍यवसायी संजीव अग्रवाल बने हुए हैं।
मथुरा में Hyundai उपभोक्‍ताओं एवं ग्राहकों के साथ इस धोखे की शुरूआत यूं तो पिछले वर्ष ही तब हो गई थी जब स्‍थानीय डीलर राजीव रतन ने Hyundai के अपने शोरूम का गुपचुप सौदा संजीव अग्रवाल के साथ कर लिया था किंतु दोबारा यह धोखाधड़ी अब फिर बड़े रूप में सामने आई है।
दरअसल, चार दिन पूर्व प्रसिद्ध मिठाई विक्रेता ब्रजवासी ग्रुप के मालिक सतीश ब्रजवासी के पौत्र यश अग्रवाल तथा नरसी विलेज निवासी पंकज अग्रवाल ने Shiel Hyundai के डीलर राजीव रतन और उनके बेटे ऋषि रतन के खिलाफ थाना गोविंदनगर मथुरा में 25 लाख रुपयों की धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज कराया।
संजीव अग्रवाल को किस बात का डर
इस बारे में बात करने के लिए Shiel Hyundai मथुरा पर संपर्क किया गया तो बात संजीव अग्रवाल से हुईं। संजीव अग्रवाल ने यह तो स्‍वीकार किया कि Shiel Hyundai की डीलरशिप अब भी राजीव रतन के नाम है, लेकिन वह इस बात का कोई जवाब नहीं दे सके कि वह किस हैसियत से Shiel Hyundai का संचालन कर रहे हैं।
संजीव अग्रवाल ने साफ कहा कि वह मोबाइल फोन पर कोई बात नहीं करना चाहते क्‍योंकि उनकी बात रिकॉर्ड की जा सकती है।
संजीव अग्रवाल का डर स्‍पष्‍ट कर रहा था कि मथुरा में Hyundai की डीलरशिप को लेकर कुछ न कुछ ऐसा है जिसे छिपाया जाना जरूरी है।
40 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी, लेकिन डीलरशिप अब भी राजीव रतन के नाम
संजीव अग्रवाल की बातों पर संदेह होने के बाद जब और जानकारी की गई तो Shiel Hyundai से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राजीव रतन ने संजीव अग्रवाल के साथ उस हिस्‍से में 40 प्रतिशत की साझेदारी तो की है जो कभी उनके छोटे भाई संजीव रतन के पास हुआ करता था परंतु डीलरशिप अब भी उनके नाम है क्‍योंकि कंपनी ने उनके द्वारा डीलरशिप ट्रांसफर करने का प्रस्‍ताव पूरी तरह ठुकरा दिया।
बिल्‍डिंग का भी सौदा
सूत्रों का यह भी कहना है कि संजीव अग्रवाल के नाम 40 प्रतिशत की पार्टनरशिप न सिर्फ मथुरा बल्‍कि एटा Shiel Hyundai में भी मय शोरूम के हुई है यानी व्‍यापार के साथ-साथ बिल्‍डिंग का भी सौदा किया गया है।
बताया जाता है कि 40 प्रतिशत की पार्टनरशिप भी मात्र दो महीने पहले तब मजबूरी में की गई जब Hyundai कंपनी ने डीलरशिप ट्रांसफर करने से साफ इंकार कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक लगभग 20 करोड़ रुपया संजीव अग्रवाल द्वारा जो राजीव रतन को दिया गया था, उसमें डीलरशिप ट्रांसफर कराना शामिल था परंतु Hyundai कंपनी इसके लिए तैयार नहीं हुई क्‍योंकि कोई भी प्रतिष्‍ठित कंपनी अपने डीलर को ऐसा कोई अधिकार नहीं देती जिससे वो डीलरशिप ट्रांसफर करा सके।
आपराधिक केस दायर करा सकती है Hyundai
कोई भी ऐसा कृत्‍य कंपनी की शर्तों का उल्‍लंघन है और कंपनी इसके लिए न केवल डीलरशिप टर्मिनेट करती है बल्‍कि आपराधिक केस भी दायर करा सकती है।
डीलर अगर अपनी डीलरशिप छोड़ना चाहता है तो ज्‍यादा से ज्‍यादा इतना कर सकता है कि इस क्षेत्र के किसी अनुभवी व्‍यक्‍ति का नाम कंपनी को रिकमेंड कर दे किंतु अंतिम निर्णय कंपनी का ही होता है।
कंपनी यदि अपनी सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उस व्‍यक्‍ति को उपयुक्‍त समझती है तो पहले वाली डीलरशिप को समाप्‍त कर नए सिरे से डीलरशिप अलॉट करेगी, न कि पुरानी डीलरशिप के साथ उसका कोई संबंध रखने की इजाजत देगी।
हजारों उपभोक्‍ताओं का क्‍या ?
ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि जब राजीव रतन और संजीव रतन दोनों ने Shiel Hyundai से नाता तोड़ लिया है और कंपनी ने संजीव अग्रवाल के नाम डीलरशिप ट्रांसफर करने का प्रस्‍ताव ठुकरा दिया है तो यहां हजारों की संख्‍या में मौजूद उन उपभोक्‍ताओं का क्‍या, जो अब तक Shiel Hyundai को मथुरा का अधिकृत डीलर समझकर अपनी गाड़ियों की सर्विस, बीमा, रिपेयरिंग आदि करवा रहे हैं।
Shiel Hyundai के शोरूम पर मौजूद संजीव अग्रवाल कहते हैं कि वो मालिक यानी डीलर नहीं हैं और राजीव रतन व संजीव रतन पहले ही मथुरा आना तक छोड़ चुके हैं, राजीव रतन के पुत्र ऋषि रतन जो पहले Shiel Hyundai का पूरा कारोबार संभालते थे, वो भी यहां नहीं झांकते, तो फिर डीलरशिप किसके भरोसे चल रही है।
पुराने स्‍टाफ को नौकरी से निकाला
यह भी पता लगा है कि Shiel Hyundai के केयरटेकर संजीव अग्रवाल ने डीलरशिप पर अपना पूरा आधिपत्‍य जमाने के लिए उन अधिकांश पुराने कर्मचारियों को निकाल बाहर किया है जिन्‍हें कंपनी ने समय-समय पर ट्रेनिंग दी थी और वो कंपनी तथा डीलर के प्रति वफादार थे।
नए ग्राहक भी होंगे धोखाधड़ी के शिकार
इन हालातों में पुराने उपभोक्‍ताओं के अलावा ऐसे नए ग्राहकों के साथ भी Shiel Hyundai पर धोखाधड़ी किए जाने की पूरी संभावना है जो मथुरा की डीलरशिप को अधिकृत समझ रहे हैं।
आज की तारीख में Shiel Hyundai पर इन बातों के लिए भी कोई जवाबदेह नहीं है कि जो पार्ट या इंजन आयल आदि सर्विस के दौरान गाड़ियों में इस्‍तेमाल किया जा रहा है वह कितना GENUINE है।
सूत्रों का कहना है उपभोक्‍ता और ग्राहकों सहित Hyundai कंपनी की आंखों में धूल झोंकने का यह काम Hyundai के ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है। वो लोग Shiel Hyundai की असलियत अपने उच्‍च अधिकारियों तक पहुंचने ही नहीं दे रहे जिससे कंपनी की डीलरशिप सहित उसका भरोसा दांव पर लग चुका है।
बताया जाता है कि मंदी के इस दौर में भी Hyundai की डीलरशिप लेने को तमाम लोग तैयार हैं क्‍योंकि Hyundai की ब्रांड वेल्‍यू काफी अच्‍छी है। संभवत: इसीलिए संजीव अग्रवाल करोड़ों रुपया लगाने के बावजूद बिना मालिकाना हक के Shiel Hyundai का संचालन कर रहे हैं।
Shiel Hyundai के भविष्‍य का आगे चलकर क्‍या होगा, यह तो देर-सवेर पता लग ही जाएगा परंतु फिलहाल Hyundai के हजारों उपभोक्‍ताओं और उन लोगों के साथ एक साजिश के तहत धोखाधड़ी हो रही है जो इस ब्रांड तथा Shiel Hyundai पर भरोसा करते हैं और उसी भरोसे के साथ आंख बंद करके Shiel Hyundai पहुंचते हैं।
Shiel Hyundai के शोरूम का नक्‍शा भी विवादों में
दूसरी ओर इस बीच यह जानकारी भी मिल रही है कि नेशनल हाईवे नंबर-2 पर नवादा क्षेत्र में जहां Shiel Hyundai का शोरूम बना है, वह Residential area है। किसी भी Residential area में कानूनन कार के किसी शोरूम का निर्माण नहीं कराया जा सकता।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने भी इसकी पुष्‍टि करते हुए बताया कि कब और किन परिस्‍थितियों में नवादा के Residential area में कार के शोरूम बना लिए गए, कहना मुश्‍किल है।
विकास प्राधिकरण से इस बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी यह मिली कि जिस प्‍लॉट पर Shiel Hyundai का शोरूम आज खड़ा है, उस पर तो रेस्‍टोरेंट के लिए नक्‍शा पास किया गया था।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस बारे में जांच के उपरांत कार्यवाही करने का भरोसा दिया है।
गौरतलब है कि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली से ताजनगरी आगरा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे नंबर दो पर स्‍थानीय डेवलपमेंट अथॉरिटी की सांठगांठ से Residential area में ऐसे और भी कई शोरूम स्‍थापित हो चुके हैं जो नियम विरुद्ध हैं किंतु आजतक उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
सच तो यह है कि अथॉरिटी से पास नक्‍शे के इतर मामूली सा भी फेरबदल दिखाई देने पर पहुंच जाने वाले विप्रा अधिकारी ऐसे शोरूम्‍स को लेकर अब तक आंखें व कान बंद किए बैठे रहे।
यही कारण है कि राजीव और ऋषि रतन ने Hyundai की अपनी डीलरशिप का सौदा शोरूम सहित किया है क्‍योंकि वह उसकी असलियत जानते हैं, और उन्‍हें मालूम है कि रेस्‍टोरेंट में पास शोरूम कभी भी उनके गले की हड्डी बन सकता है।
बहरहाल, करोड़ों रुपए के इस खेल से फिलहाल तो Hyundai कंपनी के साथ-साथ बैंकें और एजेंसी पर कार्यरत स्‍टाफ भी अनभिज्ञ है। कंपनी और बैंकों को तो जब सच्‍चाई पता लगेगी तब वो देख लेंगे किंतु जिस स्‍टाफ को निकाल बाहर किया गया है, उसका भविष्‍य पूरी तरह अंधकारमय है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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