रूबिया सईद अपहरण केस में अलगाववादी यासीन मलिक के खिलाफ आरोप तय

जम्‍मू। जम्मू की एक विशेष टाडा/पोटा अदालत ने आज यानि सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री व देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद अपहरण के मामले में अलगाववादी नेता मोहम्मद यासीन मलिक के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
जानकारी के अनुसार टाडा/पोटा अदालत के तीसरे अतिरिक्त सेशन जज ने रूबिया सईद अपहरण कांड के संबंध में यासीन मलिक के खिलाफ आरोप तय किए। इससे पहले पिछले वर्ष 15 मार्च को जम्मू में टाडा अदालत के पीठासीन अधिकारी ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह अन्य के खिलाफ 1990 में चार भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की हत्या के आरोप लगाए थे।
यहां यह बता दें कि डॉ. रूबिया सईद अपहरण केस में सीबीआई चालान के मुताबिक श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में आठ दिसंबर 1989 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार डॉ. रूबिया सईद मिनी बस में ललदद अस्पताल श्रीनगर से नौगाम स्थित अपने घर जा रही थी। तभी कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उसका अपहरण कर लिया था। सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 18 सितंबर 1990 को जम्मू की टाडा कोर्ट में आरोपितों के खिलाफ चालान पेश किया था। आतंकियों की फायरिग में पांच एयरफोर्स अधिकारियों की भी मौत हो गई थी।
डॉ. रूबिया के अपहरण और एयरफोर्स के पांच अधिकारियों की हत्या मामले में 31 साल से ट्रायल चल रहा है। इस मामले की सुनवाई पहले टाडा कोर्ट जम्मू में चल रही थी। वर्ष 2008 में आरोपितों ने इस केस का ट्रायल श्रीनगर टाडा कोर्ट में शिफ्ट करने की मांग को लेकर आवेदन दायर किया, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। इसके बाद आरोपितों ने हाईकोर्ट की श्रीनगर विंग में यही आवेदन दायर किया था। इस पर हाईकोर्ट की श्रीनगर विग ने ट्रायल कोर्ट (जम्मू टाडा कोर्ट) में जारी सुनवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामले पर कोई सुनवाई नहीं हुई। सीबीआई ने मार्च 2019 में इस केस की जम्मू में सुनवाई करवाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन दिया था। 13 मार्च 2019 को चीफ जस्टिस गीता मित्तल के निर्देश पर जम्मू में इस केस की दोबारा सुनवाई शुरू हुई। अप्रैल 2019 में यासीन मलिक ने केस ट्रायल श्रीनगर शिफ्ट करने की मांग को लेकर दोबारा आवेदन किया लेकिन हाईकोर्ट ने इसे ठुकरा दिया था। अप्रैल 2019 के बाद से जम्मू में इस केस की सुनवाई चल रही है, लेकिन कभी आरोपितों के वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से पेश न किए जाने तो कभी वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई स्थगित होती रही।
-एजेंसियां

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